बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की चाह में अधिकतर माता-पिता आजकल बच्चों का वर्तमान खराब कर रहे हैं। बच्चों को स्थानीय भाषा में बात नहीं करने दी जाती क्योंकि देसी भाषा बोलने वाले को गंवार या अनपढ़ समझने लगता है समाज। अधिकतर माता-पिता अंग्रेजी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भाषा मान कर या फिर घर में हिंदी बोल कर बच्चों को महान होने के तगमे पकड़ा रहे हैं। परिणाम स्वरुप भारत में सैकड़ों वर्षों से बोली जाने वाली देसी भाषाएँ या बोलियां अब बिलुप्तता की और अग्रसर हो गयी हैं। मैं हैरान हूँ ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश हैं जो अपने यहाँ बाहरी जानबरों को आने नहीं देते या कहें कि वैन है बाहरी जीव आप उस देश में ले कर नहीं जा सकते परन्तु भारत की देसी नस्ल की गौ को वहां की सरकार बाहें खोल कर अपना रही है क्योंकि देसी गौ के गोबर -मूत्र और दूध में जो गुण हैं वो किसी और जीव से नहीं मिलते लेकिन अपने यहाँ भारत में देसी नस्ल को तिरस्कार की दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि भारत का समाज इन्फेरियरिटी काम्प्लेक्स से ग्रस्त है। भारत के लोगों को लगता है जो कुछ भी उनके पुरखों ने संभाल कर रखा था सब कुछ बेमतलब है, फिर चाहे वो भाषा हो ,गौ हो हवा हो पानी हो खेल हो ,कपडे हों कुछ भी अच्छा नहीं है। यही विचार अधिकतर लोग अपने बच्चों के दिल और दिमाग में भर देते हैं परिणाम स्वरुप अध्पके ,कच्चे दिल और दिमाग वाले बच्चों की फ़ौज त्यार हो रही है। दोष बच्चों को नहीं दिया जा सकता , जो उनको आपने सिखाया -दिखाया -पढ़ाया बही तो सामने आ रहा है।
How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये
Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है। जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन से तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है। हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है। कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए गए। गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...
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