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Gujarat Election - One Sided Battle

Love Is The Only Medicine For This World
हमारे लिए शब्दों का महत्व आजकल बहुत अधिक होता है अगर वे नकारात्मक हैं , अगर शव्द सकारात्मक हैं तो अधिकतर लोग उनकी तरफ ध्यान भी नहीं देते।  यही हालात हमारे जीवन में भी हैं जो भी कुछ अच्छा है वो दिखता ही नहीं है लेकिन नकारात्मकता की मोटी चादर हमारे मन और चित को पूर्ण रूपेण ढके रहती है।  गुजरात चुनाव में भी यही हो रहा है , समाज को जाति के नाम पर बांटा गया और फिर धर्म के नाम की राजनीति मुख्य मुद्दा हो गयी।  गुजरात में विकास मुख्य मुद्दा पिछले चुनावों में था लेकिन इस बार पटेल आरक्षण मुहीम को इतना अधिक प्रचार मिला की चुनाव के मुद्दे सिमट कर जाति और धर्म तक ही सीमित हो गए।  दोष नेताओं को नहीं दे सकते समाज को जनता को जैसा चाहिए वही मुद्दा मुख्य हो जाता है। गुजरात के चनावों को काफी महत्व पूर्ण मन जा रहा है क्योंकि मोदी का राज्य है और इसके विकास मॉडल के  नाम पे ही मोदी सत्ता में आये थे।  कान्ग्रेस् ने आरक्षण तथा और कई बातों को जाति से जोड़ कर चुनावों से पहले ही विकास को पागल करार दे कर गुजरात को पिछड़ा राज्य घोषित कर दिया गया।  अब बीजेपी ने भी चुनावों में वही रणनीति अपना ली।  रही सही कसर अय्यर साहेब ने पूरी करदी मोदी को नीच राजनीति का आरोपी बना कर।  बिहार चुनाव में मोदी ने डीएनए की बात की थी और वहीँ से बिहार चुनाव का मुद्दा बिहार अस्मिता हो गया , बीजेपी को आतम घाती गोल मोदी द्वारा हो गया।  खैर अब भी बिहार में बीजेपी सत्ता में है।  लेकिन गुजरात में कपिल सिब्बल और अय्यर के शब्द कांग्रेस को आत्मघाती गोल कर चुके हैं ऐसा प्रतीत होता है।  पटेल ,दलित ,पिछड़ा ये सब अब गौण मुद्दे हो गए हैं , इनकी तैयारी कांग्रेस पिछले तीन वर्ष से कर रही थी लेकिन बीजेपी को चुनावों में इसका तोड़  गुजरात अस्मिता के ऊपर चोट के रूप में मिल गया और लगता है चुनाव एक पक्षिय  हो गया है 

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