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Sahitya Academy Award and Secular / किसान की मौत साहित्य को संजीवनी लगती रही

आजकल साहित्य अकैडमी अवार्ड बापिस करने की होड़ लगी हुई है ,सेक्युलर साहित्यकार काफी मुस्तैदी के साथ कम्युनलिज्म का बिरोध कर रहे हैं , अख़लाक़ जैसा सेक्युलर अगर मरता है तो साहित्यकार दुखी होता है लेकिन जब संजीव कुमार नाम का कम्युनल लड़का ,बिहार में मुस्लिम समुदाय द्वारा मार दिया जाता है तो ना सेक्युलर मीडिया खबर दिखाता है और  ना ही किसी  साहित्यकार को कष्ट होता है। खैर, आज़ादी तो ज़रुर भारत को 1947 में मिली थी लेकिन अधिकतर पढ़ा लिखा वर्ग अंग्रेज़ों की मानसिक गुलामी आज भी करता रहा है उसमे विदेशों में पढ़े कांग्रेसी नेता जैसे खुर्शीद ,राहुल आदि तथा अधिकतर सेक्युलर साहित्यकार अब तो इनकी पहचान बड़ी आसान हो गयी है ! आज़ादी के बाद के अधिकतर भारतीय साहित्यकार अपराध बोध तथा हीन भावना से ग्रसित रहे हैं। पूरी दुनिया में  जितने भी महान प्रेरक हुए हैं वे एक ही बात कहते रहे हैं 'नज़र बदलो ,नज़ारे बदल जाएंगे ' ये छोटी सी बात अगर देश के सेक्युलर साहित्यकार नहीं समझ रहे हैं तो आम आदमी कैसे समझेगा।  एक साहित्यकार टी बी  बहस में कह रही थी "अख़लाक़ की मौत के बाद अब दम घुटता है इस...

History of Noakhali 1946 Genocide of Hindus/नोखली नरसंहार 10 अक्टूबर 1946

"नोखली, पश्चिम बंगाल का हिस्सा है इस जगह 10  अक्टूबर 1946 को दंगे शुरू हुए , मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारन हिन्दू इस दंगे में सीधा और आसान टारगेट थे। सबसे ज्यादा दुःख और कष्ट औरतों ने सहा। बहुत सी औरतों को अपने पति को मरते देखा और फिर जबरन उन मर्दों से शादी करनी पड़ी जिन लोगों ने उनके पतियों को मारा था। उन औरतों के चेहरे मृत देह के चेहरे लग  रहे थे। दुराचार यहीं नहीं रुका था , बल्कि हज़ारों हिन्दुओं की जान बख़्शने की कीमत गौ -मांस खिला कर उनको इस्लाम में शामिल होना रखी गयी थी। " ये शव्द मुरिअल लिस्टर राहत कार्य में आई हुई थीं ,ने 6 नवम्बर 1946 को लिखे थे (वी वी नागरकर की पुस्तक से ) अमृता बाजार पत्रिका 23 -10-1946 के लेख में लिखती है :- 13 दिन से 120 गाओं ( रामगंज,लक्ष्मीपुर,रायपुर,बेगमगंज और सेनबाग़  थाना क्षेत्र  जिला नोखली )  जिनमे 90 हज़ार हिन्दू रहते थे तथा 70 हज़ार ग्रामीण चांदपुर तथा फरीदगंज थाना जिला कोमिला में हथियार बंद लोगों ने बंधी बनाया हुआ है। 'मृत्यु' इन लोगों के चेहरे पे साफ़ दिख रही है , फ़ौज द्वारा उन लोगों के लिए रसद पहुंचाई जानी चाहिए , व...