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कब तक ज़ाकिर नाइक जैसे लोग देश को बांटने में कामयाब होते रहेंगे।

कल किसी मुस्लिम जानकार ने डॉ ज़ाकिर नाइक के ज्ञान के बखान से परिपूर्ण लेख फेसबुक पे शेयर किया , जिसमे लिखा था के वेदों में गौ -मांस खाने का समर्थन किया गया है।  एक दम से गुस्से की लहर सी दौड़ गयी , क्रोध तो आप जानते हैं दिमाग  का दही कर देता है। खैर ,ऐसे -तैसे करके शान्ति प्राप्त हुई तो दिमाग की बत्ती भी जल उठी। अब देखो ना एक  पढ़े लिखे मुस्लिम होने के नाते डॉ नाइक ने हिन्दू ग्रन्थ, यहाँ तक की वेदों   का अध्ययन भी कर लिया ,  मै बताना चाहूंगा वेदों में संस्कृत भाषा का प्रयोग हुआ है और संस्कृत भाषा में कुल शब्दों की संख्या ढाई अरब से अधिक है संस्कृत में एक ही शब्द के कई अर्थ निकलते हैं। लेकिन ज़ाकिर नाइक ने मेहनत करी और हिन्दू ग्रंथों से वो ऋचाएं ढूंढ निकालीं जिनमे जीव ह्त्या और गौ-हत्या को ज़रूरी तथा महान बताया गया है।  मै हैरान नहीं हुआ , लेकिन दुखी ज़रूर हुआ था। गुस्से  में अंग्रेजी में कुछ कठोर शब्द   भी फेसबुक पे चेप दिए। एक विद्वान जीव ह्त्या के समर्थन के लिए दूसरे धर्मो के ग्रंथो से ऋचाएं ढूंढ कर सेक्युलर समाज को बता रहा ...

ISIS के खिलाफ फतवे ज़ारी

ये खबर भारत के मीडिया ने दवा दी , देश में कोई भी मुस्लिम जब देश प्रेम और भाई चारे की बात करता है तो उसे सम्पूर्ण उत्साह के साथ पूरा समर्थन और सम्मान मिलना चाहिए।  भारत का दुर्भाग्य है के जनता को खवर पहुंचाने वाले खवर नफीस या तो कम्युनिस्ट माईंड / सोच के हैं या फिर बिकाऊ किसम के पत्रकार हैं ,  दोष इन लोगों का नहीं है , पत्रकारिता में इम्मान्दारी से काम करने वाले को तो गुज़ारे लायक पगार भी नहीं मिलती।  अधिकतर लोग टी वी में चमकती हसीनाओं को खबरें देते देख कर सोच लेते हैं के पत्रकारों की तो बल्ले-बल्ले होती है लेकिन सच बहुत भयाभय और कड़वा है ,खैर इस मुद्दे पे कभी फिर बात करेंगे , तो मुसलमान अगर isis का झंडा उठाते हैं तब तो टी वी पर खूब बहस  और खबर कई दिनों तक दिखाई जाती है ,लेकिन जब मुस्लिम लोग isis के खिलाफ झंडा उठाते हैं तो ये खबर , खबर ही नहीं बनती।  इससे सिर्फ एक ही सन्देश जाता है के भारत का मीडिया खाता भारत का है लेकिन उस ही थाली में छेद भी कर रहा है जिसमे खता है।  दुःख दायक है , परन्तु एक बात तो साफ़ हो गयी है के सोशल मीडिया ने पारम्परिक मीडिया की नाक में ...