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गुंणों का प्रभाव तथा लालू-खुर्शीद -गुजरात के पटेल , सरकारी कर्मचारी और बिहार के लोग

 आज  एक मित्र  से बात हो रही थी , वे काफी परेशान थे 'देश  के सरकारी कर्मचारिओं के  काम चोरी और बेईमानी  की आदत से " बात सही भी थी।  अगर भारत के सरकारी कर्मचारी अपने आप को भारत का हिस्सा मानते और अपना 50 % काम भी ईमानदारी से करते तो आज सभी सरकारी कर्मचारियों को पेंशन की सुबिधा भी मिलती और उनके बच्चों को भी सरकारी नौकरी आराम से मिलती क्योंकि देश के हालात बहुत अच्छे होते। लेकिन ये संभव ही नहीं हो पा रहा , भारत को लूटने में अधिकतर भारतीय लोग तो अंग्रेज़ों से भी आगे निकल गए हैं , लेकिन ये भूल गए के अँगरेज़ तो भारत से लूट का सामान ब्रिटेन ले गए , लेकिन वे लोग (भारतीय लूटेरे ) भारत की जनता से लूटा सामान कहाँ ले जाएंगे ?  मैं यहाँ नेताओं की बात नहीं कर रहा हूँ , मै यहां सिर्फ साधारण भारतीयों  की बात कर रहा हूँ जो सरकारी नौकरी मिलने से पहले तक तो देश भक्त और ईमानदार होते हैं लेकिन नौकरी मिलते ही उनकी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं।  खैर, पांच गुण(काम -क्रोध - लोभ -मोह -अहंकार ) जो पूरे ब्रह्माण्ड को अपने प्रभाव में ही रखते हैं , सभी पर असर करते हैं , अगर कोई बेईमानी कर रहा है तो लोभ , मोह या पैसे की कामना (काम ) के गुण असर किये हुए होता है  . कोई भी जीव इन पांच गुणों से बच नहीं पाता है। लेकिन उससे भी बड़ी बात के इस चीज़ का ज्ञान भी उसे नहीं हो पाता है।  अगर किसी को अपनी गलती का ज्ञान हो जाए तो अधिक ना सही 10 -15 %  तक गलती सुधारने की कोशिश करता है।  अब सबसे बड़ा प्रश्न ये है की गलती का ज्ञान कोन करबाए ? ये काम होता है संगती से किसी की संगती कैसी है।  अब अगर किसी को इन पांच गुणो का ही ज्ञान ना हो तो बचाव कैसे हो , इस ज्ञान के लिए एक अच्छा मित्र ,गाइड या  गुरु होना ज़रूरी  होता है।  अछा मैं बड़ा हैरान होता हूँ आजकल जब बड़े -बड़े पत्रकार और पढ़े -लिखे लोग सत्संग पर ही प्रशन लगा देते हैं।  भाई  सकारात्मकता और अकल की बात सिर्फ बड़े बड़े संस्थानों में ही सिखाई जा सकती है क्या ? अगर देश में अबतक के हुए घोटालों पर नज़र दौड़ाएंगे तो आपको आश्चर्य होगा अधिकतर आरोपी बहुत अधिक शिक्षा ग्रहण किये होते हैं और उच्च संस्थाओं से डिग्रियां प्राप्त किये होते हैं। हाहाहा भाई शिक्षा कैसी हुई है और कहाँ हुई है इससे भी अधिक चीज़ जो असरकारक है  इंसान पे किस गुण का असर  है।  आजतक पर 'पंचायत ' कार्यक्रम में एक ही कॉलेज में पढ़े हुए दो महान लोग देखे लालू प्रसाद यादव और पुण्य प्रसून वाजपई ,  एक ईमानदार क्रांतिकारी नेता और दुसरा क्रांतिकारी पत्रकार।  भूतपूर्व  मंत्री  कांग्रेस सरकार के जिन्होंने अपंग लोगों के नाम पर करोड़ों की लूट मचाई विदेशी यूनिवर्सिटी की देंन थे हाँ सलमान खुर्शीद की ही बात हो रही है। ये लोग अच्छी सोच से जीवन की शुरुआत करते हुए लुटेरे बन गए क्यों ? अब चिंता की बात बीजेपी सरकार के लिए है , इनके मंत्रिओं पे किस गुण का असर है , अभी तक तो मोदी का असर साफ़ दिख रहा है लेकिन आगे भी असर रहेगा देखना होगा।  हाँ , बिहार चुनाब मज़ेदार होने वाले हैं , बीजेपी -आरएसएस क्या कर पाते हैं देखना होगा , लेकिन लालू -नितीश -राहुल की जोड़ी अभी से मनोरंजन करने लगी है , लालू ने तो साफ़ तोर पे ऐलान किया है के ये इलेक्शन मंडल-2  है यानी के आरक्षण का लोभ बिहारियों को फिर से दिया जा रहा है।  अब लोभ के फेर में बिहारी अपना वोट लालू को देंगे या विकास के नाम पे मोदी को। आरक्षण  से याद आया पटेलों की आरक्षण की मांग , लोभ के गुण ने पटेलों को इतना गिरा दिया के राज्य की सबसे अमीर जाती के लोग गरीब और पिछड़ी जाती का टैग चाहने लगे हैं और लाखों की कारों में सवार हो कर मांग कर रहे हैं , सिर्फ 'लोभ ' ने पटेलों की देश भक्ति और मेहनत की रोटी खाने वाली जाती के रूप में पहचान को एक झटके में खत्म कर दिया , लेकिन ये कड़वा सच उनको कोण समझायेगा !!!!!!!!!!!!!!!

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