देश के अंदर किसी भी तरह से अस्थिरता लाना और बाहर पाकिस्तान का एटम बॉम्ब से धमकाना एक ही सिक्के के दो पहलु लगते हैं। जिस तरह की भाषा नितीश -लल्लू -सोनिया -केजरी बोल रहे हैं उससे एक बात तो साफ़ है के मोदी सरकार को चारो तरफ से घेरने की तैयारी पूरी प्लानिंग के साथ हो रही है. आरक्षण का भूत जो पटेलों ,जाटों,गुज्जरों के सर चढ़ रहा है उसमे घी/तेल डालने वाले महाठगबंधन की चांदी दिख रही है।
उधर रिटायर फौजियों का देश सेवा के बदले देश की आमदनी में हिस्सा मांगना या यूँ कहें माँ की सेवा का मुआबजा मांगना और फिर 1965 के युद्ध के 50 जीत उत्सव का बहिष्कार बताता है के देश के हालात बदतर बनाने की पूरी साजिश की गयी है। ये जो भी बारदातें हो रही हैं एक -दूसरे से बिलकुल जुडी हुई हैं।
मोदी के प्रधान मंत्री बनने से सिवाये देश भक्तों के सभी दुखी थे और अमेरिका से लेकर चीन - पाकिस्तान आदि देश तो एक दम सदमे में पहुँच गए थे। मोदी सरकार द्वारा भूमि अधग्रहण बिल रोकना सही वक्त पर लिया गया सही फैसला है। मोदी का विधयक मुझे पसंद था लेकिन बीजेपी अपने इस विधेयक को जनता के बीच नहीं ले जा पाई , मोदी के इलावा कोई नेता नहीं दिखा जो इस बिल की सचाई जनता को बताने की कशिश कर रहा हो। एक मोदी -क्या क्या करे।
खैर बिहार चुनाव मेरे हिसाब से मोदी जीत चुके हैं , कल महाठगबन्दन रैली में तो मज़ाक ही हो रहा था, लेकिन विकास की बात शुरू होना , नितीश द्वारा जनता से विकास के वादे करना ये दीखाता है के बिहार में लोग अब विकास की परिभाषा समझने लगे हैं। DNA की राजनीती बिहार में इस बार कामयाब नहीं होगी जनता परफॉर्मेंस चाहती है और लालू की परफॉर्मेंस बिहारी जनता और बिहारी गौ-भैंसे सभी देख चुके हैं , लेकिन दिल्ली के ठग केजरीवाल को लालू के ठगबंधन में याचक रूप में देख कर ख़ुशी हुई , कम से कम एक बात तो साफ़ है की मोदी को रोकने के लिए पूरा बिपक्ष एक प्लैटफ्रॉम पे आ कर तैयारी कर रहा है.
मीडिया द्वारा मोदी सरकार के बिरोध में मुहीम चालू रखने के लिए मीडिया बधाई का पात्र है। पिछले कई सालों से मोदी के बिरुद्ध मीडिया का यही रवैया रहा है लेकिन मोदी ये लड़ाई हर मोर्चे पर जीतते आये हैं।
जनता जानती है वादों और इरादों की बात - बिहार चुनाव इस बात पर मुहर लगा देंगे ??
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