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क्या सौदा नहीं है एक रैंक एक पेंशन ? One Rank One Pension


पिछले काफी समय से भारत के भूतपूर्व सैनिक ,एक रैंक एक पेंशन, की मांग कर रहे हैं. पहले मुझे इसमें कोई दिलचस्वी नहीं  थी लेकिन आज 15 अगस्त के दिन एक भूतपूर्व सैनिक टीवी पे बैठ कर सैनिको के सेवा और समर्पण की बाते करते हुए खूब एहसान जता  रहा था देश पर , बात यहीं तक रहती   तो ठीक था ,लकिन उस भूतपूर्ब सैनिक ने अपने आप को जब  चन्द्र शेखर  आज़ाद , सुभाषचन्द्र बॉस , भगत सिंह, राजगुरु आदि से तुलना करी। मैंने कभी भी किसी भी आज़ादी के दीवाने को अपनी देश सेवा या शहादत की कीमत निर्धारित करते नहीं सूना है।  हो सकता है के वक़्त के साथ शहादत की परभाषा बदली हो लेकिन शाहदत या सेवा करने वाला तनख्वा या पगार लेता है या मांग करता है ये अभी आज़ाद भारत में ही देख रहा हूँ।
                    आप आज के संधर्व में ही अगर बात करें तो जब भी कोई सैना में भर्ती के लिए जाता है तो देश सेवा बाद में पहले उसके लिए सैना की नौकरी रोज़गार होती है।  अब ड्यूटी देते समय अगर  आतंकी हमले में या किसी और कारन किसी सैनिक की मृत्यु होती है तो उसका हर्जाना मृतक सैनिक के परिवार को सरकार पैसे ,नौकरी तथा अन्य कई सुबिधाओ के रूप में भर्ती है।  कोई भी सैनिक मुफ्त में काम नहीं कर रहा है ये आज का सबसे बड़ा सत्य है।
अगर उस सैनिक को उसका शिक्षक अछि शिक्षा नहीं देता तो क्या वो सैना में भर्ती हो सकता था ? सैनिक के परिवार को पानी समय पर  पहुंचाने वाले वाटर सप्लाई के कर्मचारी क्या सेवा नहीं कर रहे ? क्या सैनिक के परिवार को बिजली सुचारू ढंग से पहंचाने वाले  बिजली बिभाग के कर्मचारी देश सेवा नहीं कर रहे ? क्या बैंक , रेल , सरकारी /प्राइवेट बस,ट्रक , टैक्सी ,  एम्बुलेंस चालक  , पुलिस कर्मचारी  , वह मज़दूर जो सैनिक की अनुपस्थिति में उसके घर के निर्माण में ईमानदारी से जुटा रहता है, वो देश सेवा नहीं करता?
भूतपूर्व सैनिको ने नौकरी  के दौरान वेतन लिया होता है तथा  सभी सरकारी सुविधाएँ प्रयोग की होती हैं ,मुफ्त में कोई भी सेवा नहीं देते सैनिक। रिटायर मैंट के बाद आज जो पेंशन भूत पूर्व सैनिक  प्राप्त करते हैं  वो किसी भी अन्य सरकारी बिभाग के समतुल्य  है या अधिक है , साथ ही भूतपूर्व सैनिक को सरकारी  नौकरी में आरक्षण  आदि कई सुविधाएँ  मिलती हैं , उनके बच्चों को भी कई सरकारी  नौकरियों में आरक्षण मिलता है।  मतलब साफ़  है सेवा के  नामपर भूतपूर्व सैनिक अब सौदेवाजी पे उत्तर आये हैं. भारतीय समाज में आज से  पहले जो सम्मान सैना को या सैनिक को मिलता रहा है ,इस तरह की सौदेवाज़ी  से अब वो   बात  इतिहास में गुम होने   का खतरा उत्पन हो गया है

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