हम जानते हैं कि मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख तत्व हैं जो मनुष्य को नियंत्रित करते रहते हैं अर्थात एक कड़ी में बाँध कर रखते हैं। ये तीनो ही आपस में मिश्रित हैं और किसी भी तत्व की कमी अन्य दो को भी निकम्मा कर देती है या फिर अन्य दो मिलकर तीसरे की कमी को पूरा कर लेते हैं। गाडी के तीन प्रमुख तत्व इंजन , ईंधन तथा चालक सभी अलग -अलग हैं। परन्तु मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख तत्व भावना , बुद्धि और संकल्प शक्ति इकठ्ठे हैं तथा क्रिया -प्रतिक्रिया करके एक -दूसरे को काफी हद तक प्रभावित करते हैं।
मानलो एक पुस्तक आप ने खरीदी और पढ़ने बैठ गए। यदि पुस्तक आपको पसंद है तो आप बड़े मजे से आनंद लेते हुए पुस्तक पढ़ेंगे। सबकुछ समझ भी आएगा और याद भी रह जायेगा। क्योंकि आपकी पुस्तक के प्रति भावना बहुत प्रबल है तो आप सारी पुस्तक जल्दी ही पढ़ कर ,समझ कर बहुत खुश हो जायेंगे । इसके विपरीत अगर पुस्तक के प्रति भाव अच्छे नहीं हैं ,रूचि नहीं है तो हो सकता है मज़बूरी में आपकी नज़रें पुस्तक पे हों लेकिन मन वहां नहीं होगा। आप तीव्र बुद्धि हैं परन्तु उस पुस्तक का विषय आपको समझ ही नहीं आएगा, फिर याद भी नहीं होगा।
ऐसा अघिकतर लोगों /विद्यार्थियों के साथ होता है। ऐसे समय में क्या करना चाहिए ? एक काम हो सकता है पुस्तक फैंको तथा कुछ और करो। किन्तु परीक्षा सामने है , नहीं पढ़े तो फेल होंगे। फिर क्या करना चाहिए ?
ऐसे समय में बुद्धिमान लोग पसंद , शौक या भावना की कमी को पूरा करने के लिए संकल्प शक्ति को आगे ले आते हैं। ये शक्ति आपके भटकते मन को बार -बार खींच कर पुस्तक के विषय पर ले आएगी। परिणाम स्वरुप आप परीक्षा की तयारी अच्छे ढंग से कर पाएंगे। फिर धीरे -धीरे आपके मन में उस पुस्तक या विषय के प्रति रूचि भी उत्पन हो जाएगी। अब आप सोचो कि उस पुस्तक को पढ़ कर पेपर की त्यारी करने में किस तत्व का सबसे बड़ा योगदान है ? ये अंदाज़ा लगाना असंभव है की तीनो तत्वों में से सबसे अधिक किस तत्व ने सहयोग दिया क्योंकि ये तीनो -भावना , बुद्धि और संकल्प शक्ति एक मिश्रण के रूप में रहते हैं जिन्हें पृथक करना असंभव होता है
एक अन्य उदाहरण पर ध्यान दें - एक छात्र बहुत ही उच्च कोटि की मानसिक दक्षता के साथ पैदा हुआ है , प्रकृति ने उसे उत्कृष्ट मानसिक बल प्रदान किया है साथ ही लगन तथा उत्साह भी भरपूर मात्रा में उसके पास हैं। मेधावी इतना के एक बार कक्षा में जो सुना -समझा याद ,जिस प्रश्न के अधिकतर छात्रों को एक या दो पहलु दिखते हैं उसे उसी प्रश्न के 8 - 10 पहलु दिखाई दे जाते हैं और बड़ी ततपरता के साथ वह उनपर विचार करने लगता है। कितनी ही बातें उसे पक्ष और विपक्ष में दिखाई देती हैं जिनको वह तोलता रहता है। बस यहीं तक वह काम कर पाता है सोच -विचार के बाद निर्णय कि योग्यता उसमे नहीं है , परिणाम स्वरुप निर्णय को कार्यरूप में परिणत नहीं कर पाता। संकल्प शक्ति या दृढ निश्चय शक्ति की दुर्बलता उसकी बुद्धि तथा उत्साह की प्रतिभा को बिलकुल शून्य कर देती है। हाँ -ना के निर्णय में देरी उसकी सफलता के सभी मार्ग बंद कर देती है।
एक विद्यार्थी जिसे पढ़ाई में कोई ख़ास रूचि नहीं , ऐसे ही गप -शप करके या आमोद -प्रमोद में समय बर्बाद करता रहता है तेज़ बुद्धि का मालिक है लेकिन अपनी प्रखर बुद्धि का फायदा नहीं ले पाता। किसी खदान में पड़ा हीरा तब तक मूल्य बान नहीं होता जब तक मिट्टी में दवा पड़ा है। उसे बाहर निकालो सफाई करो , तराशो फिर देखो करोड़ों की कीमत मिलती है चमक देख कर।
एक और भाई साहेब हैं प्रखर बुद्धि पढ़ने में तेज़ ,कुछ भी पढ़ लेते हैं इतना शौक है पढ़ाई का। कभी इतिहास ,कभी भूगोल , कभी मनोरंजन तो कभी दर्शन शास्त्र अर्थात सभी पुस्तकें उसके लिए आकर्षण का केंद्र बन जाती हैं। परन्तु व्यबहारिक रूप में उस अर्जित ज्ञान का फायदा नहीं ले पाता क्योंकि बिना प्लानिंग के ,बिना योजना के कुछ भी पढ़ना एक विद्यार्थी के लिए समय बर्बादी से अधिक कुछ नहीं होता।
बेपेंदे के लोटे से अधिक उस बेचारे की पहचान नहीं बन पाती क्योंकि उसमे इच्छा शक्ति की कमी है या फिर ताकतवर इच्छा शक्ति का दुरूपयोग ,लेकिन दोनों कारणों में क्षति उस युवक की है उसके भविष्य की है
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https://youtu.be/W1K3E0jjTyg
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