गेहूं के आटे का हलवा :- गेहूं का आटा ,घी ,चीनी तथा गऊ दूध के प्रयोग से बनाया गया हलवा वीर्यबर्धक होता है। ध्यान रहे जिस गऊ के बछड़े बड़े हो गए हों उसके दूध के प्रयोग का असर ज्यादा होता है
शतावर्यादि चूर्ण :- शतावर ,नागबला ,विदारीकंद ,गोखरू ,आम्बले के सूखे फल इन पाँचों को अलग -अलग चूर्ण करके घी में पका कर चीनी डाल कर रोज सेवन करने से वीर्य और बल में वृद्धि होगी।
मुसलयादि चूर्ण :- सफेद मूसली ,मखाने ,गोखरू सम भाग लेकर चूर्ण बनाएं। दूध में पका कर चीनी डाल कर रख लें। प्रतिदिन सवेरे सेवन करें।
शतावरआदि योग :- शतावर ,गोखरू,अश्वगंध, पुनर्नवा ,नागबला तथा सफेद मूसली के चूर्ण को गौ घृत में पका कर चीनी मिला कर योग त्यार कर लें। इसके सेवन से वीर्य दुर्बलता ख़त्म होती हो।
विदारिकन्द चूर्ण :- विदारिकन्द चूर्ण को उदुंबर फल /गूलर के फल जितनी मात्रा में घी में मिला कर दूध के साथ खाने से किसी भी तरह की कमज़ोरी दूर होती है तथा वीर्य में वृद्धि होती है।
गोक्षरु चूर्ण :- गोक्षरु चूर्ण को बकरी के दूध में पका करके ठंडा करके शहद मिला कर पीने से नपुंसकता भी नष्ट हो जाती है।
अश्वगंधा का सेवन आम्बले के साथ करने से वीर्य वृद्धि होती है , अगर इनके साथ पुनर्नवा मिला लिया जाये तो सोने पे सुहागा वाली कहावत सिद्ध हो जाती है।
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