प्रत्येक कार्य आरम्भ में सिर्फ एक अदृश्य विचार ही होता है मतलब अगर सोचने भी हो तो बुद्धिमानी से ही सोचो , अर्थात ऐसे ही कुछ भी नहीं सोचना , सोचना भी कला है क्योंकि जैसा हम सोचते हैं हम वैसे ही हो जाते हैं और हमारे साथ वैसा ही हो जाता है। याद रखो हर काम सबसे पहले मन में उत्पन्न होता है , इसलिए मन को विकसित करने का सीधा सा अर्थ है उत्तम फल या परिणाम को निश्चय करके प्राप्त करना। मानसिक कार्यक्षमता बढ़ाना या बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील होना हर मनुष्य का कर्तव्य भी है और अधिकार भी।
याद रखो संसार में मनुष्य का अस्तित्व सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि उसने अपने मस्तिष्क के विकास के लिए क्या किया। सभी महांपुरषों , व्यापार , राजनीति ,खेल जगत के सफलतम लोगों तथा साधारण मनुष्य में बस यही तो फर्क है और अटल सत्य है ,कि ये फर्क जितना मर्जी बड़ा हो इसे दूर किया जा सकता है इसे मिटाया जा सकता है। साधारण मनुष्य असाधारण योग्यतांए प्राप्त कर सकता है केवल एक ही शर्त है " अपने मस्तिष्क को अच्छे ढंग से काम में लगाने का गुर सीख ले " .
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