ग्रीन चाय की बात अब पुरानी हो गयी है क्योंकि अब नए ज़माने में रंग जमा चुकी है "ग्रीन कॉफ़ी" . ग्रीन कॉफ़ी वही पुरानी कॉफ़ी है परन्तु अपने प्राकृतिक रूप में। कॉफी के दानों का असली रंग हरा ही होता है लेकिन इसे भूनने पर इसका रंग हल्का भूरा या चॉकलेट जैसा हो जाता है निर्भर करता है कितने तापमान पर कितनी देर दाने भुने गए हैं। किसी भी दाने को अगर आप भूनते हैं तो उसके अघिकतर प्राकृतिक गुण नष्ट हो जाते हैं, यही कॉफ़ी के दानों के साथ भी हुआ। ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड नाम का एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। भुनी हुई कॉफी में इसकी मात्रा बहुत कम रह जाती है।
क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में पाचन प्रक्रिया को चुस्त - दरुस्त करता है परिणाम स्वरुप भोजन का पाचन सही ढंग से होता है और शरीर में से अपशिष्ट पदार्थ पूरी तरह से बाहर निकलते हैं और शरीर में चर्बी जमने ही नहीं देते। अनचाही चर्बी जब शरीर में नहीं होगी तो कोलेस्ट्रॉल भी नहीं बढ़ेगा अर्थात रक्त बाहिकाओं में रक्त परिवहन का मार्ग अव्रुद्ध नहीं होगा मतलब मोटापा , ब्लड प्रेशर , हिर्दय के रोग , मधुमेह , मस्तिष्क के रोगों से बचाब रहेगा। क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में कार्बोहाईड्रेट का पाचन भी रोकता है जिस कारण मोटापा कम होता है ।
ग्रीन कॉफी में कैफीन की मात्रा भी कम होती है और स्वाद भी बहुत अच्छा होता है। ग्रीन कॉफी प्लेटलेट्स बनाती है अर्थात कोलेस्ट्रॉल का निर्माण कम होता जिस कारण शरीर में रक्त संचालन अच्छे ढंग से होता है , तंत्रिका तंत्र भी चुस्त -दुरुस्त रहता है । यही नहीं ग्रीन कॉफी शरीर से अनचाही चर्बी / फैट को भी खत्म करता है।
ग्रीन कॉफी में क्रोमियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो मनुष्य की भूख को नियंत्रित करता है साथ ही मिठाई की तरफ भी ध्यान नहीं जाने देता। मस्तिष्क को खाने की ललक के सिग्नल भी कम हो जाते हैं क्योंकि ग्रीन कॉफी 'भूख नहीं ' वाले संदेश भेजने के लिए उत्तरदाई गलयाइकोजन का संग्रह करने में सहायता करती है मतलब भूख कम करने में भी सहायक है।
प्रयोग
ग्रीन कॉफी पाउडर को पानी में उबाल लें और पियें । इसमें स्वाद अनुसार मीठा डालने की इच्छा हो तो शहद का प्रयोग करें चीनी का प्रयोग न करें।
ग्रीन कॉफी में आप निम्बु रस का भी प्रयोग कर सकते हैं ग्रीन कॉफी पाउडर को पानी में उबाल कर गिलास में डाल लें फिर निम्बू रस उसमे डाल कर पीएं।
निम्बू और शहद अपने आप में एंटीऑक्सीडेंट्स हैं ग्रीन कॉफी में मिला कर पीने से बहुत सकारात्मक परिणाम आएंगे।
क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में पाचन प्रक्रिया को चुस्त - दरुस्त करता है परिणाम स्वरुप भोजन का पाचन सही ढंग से होता है और शरीर में से अपशिष्ट पदार्थ पूरी तरह से बाहर निकलते हैं और शरीर में चर्बी जमने ही नहीं देते। अनचाही चर्बी जब शरीर में नहीं होगी तो कोलेस्ट्रॉल भी नहीं बढ़ेगा अर्थात रक्त बाहिकाओं में रक्त परिवहन का मार्ग अव्रुद्ध नहीं होगा मतलब मोटापा , ब्लड प्रेशर , हिर्दय के रोग , मधुमेह , मस्तिष्क के रोगों से बचाब रहेगा। क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में कार्बोहाईड्रेट का पाचन भी रोकता है जिस कारण मोटापा कम होता है ।
ग्रीन कॉफी में कैफीन की मात्रा भी कम होती है और स्वाद भी बहुत अच्छा होता है। ग्रीन कॉफी प्लेटलेट्स बनाती है अर्थात कोलेस्ट्रॉल का निर्माण कम होता जिस कारण शरीर में रक्त संचालन अच्छे ढंग से होता है , तंत्रिका तंत्र भी चुस्त -दुरुस्त रहता है । यही नहीं ग्रीन कॉफी शरीर से अनचाही चर्बी / फैट को भी खत्म करता है।
ग्रीन कॉफी में क्रोमियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो मनुष्य की भूख को नियंत्रित करता है साथ ही मिठाई की तरफ भी ध्यान नहीं जाने देता। मस्तिष्क को खाने की ललक के सिग्नल भी कम हो जाते हैं क्योंकि ग्रीन कॉफी 'भूख नहीं ' वाले संदेश भेजने के लिए उत्तरदाई गलयाइकोजन का संग्रह करने में सहायता करती है मतलब भूख कम करने में भी सहायक है।
प्रयोग
ग्रीन कॉफी पाउडर को पानी में उबाल लें और पियें । इसमें स्वाद अनुसार मीठा डालने की इच्छा हो तो शहद का प्रयोग करें चीनी का प्रयोग न करें।
ग्रीन कॉफी में आप निम्बु रस का भी प्रयोग कर सकते हैं ग्रीन कॉफी पाउडर को पानी में उबाल कर गिलास में डाल लें फिर निम्बू रस उसमे डाल कर पीएं।
निम्बू और शहद अपने आप में एंटीऑक्सीडेंट्स हैं ग्रीन कॉफी में मिला कर पीने से बहुत सकारात्मक परिणाम आएंगे।
Comments