भारत में बाबा साहेब की जयंती बहुत बड़े पर्व के रूप में मनाई जा रही है। सोशल मीडिया में कई लोगों के उत्साह को सलाम करने का मन करता है , उत्साह में दिए गए गलत बयान या अधूरे ज्ञान से थोड़ा दुःख और अचरज होता है लेकिन 14 अप्रैल नया 14 नवंबर बन रहा है ये तो साफ़ है। बाबा साहेब को बहुत कष्ट सहने पड़े लेकिन जिस कारण बाबा साहेब महान बने वो था उनका ज्ञान ,शिक्षा और ज़िम्मेदारी उठाने की इच्छा। बहुत कम लोग ये जानते हैं के जब जात-पात भारतीय समाज में ऊंचाइयों पर था तब बाबा साहेब तथा उनके कुछ साथियों को उच्च शिक्षा की तयारी ब सहायता एक ब्राह्मण ने की थी। खैर ये कोई बड़ी बात नहीं है अगर कोई ब्राह्मण धारा के विरूध जा कर समाज में बदलाब की कोशिश करे। आज इस बात को बताने का प्रयोजन इतना भर है के मनु बाद की बात कर रहे कुछ लुच्चे लोग दलित और ब्राह्मणो को आपस में दुश्मन बता रहे हैं। उनको मनु समृति ज़रूर पढ़नी चाहिए।
अगर कोई भी शख्स समाज को तोड़ने या बांटने वालों को ध्यान से देखेंगा तो दंग रह जाएंगा। #आशुतोष ,जी बिलकुल #केजरीवाल स्पेशल, आज #एकलब्य को दलित बता रहा था और #द्रोणाचार्य को अन्यायी। लेकिन दुःख की बात ये है के आशुतोष ने शायद कभी महाभारत नहीं पढ़ी अगर पढ़ते तो एकलव्य के बारे में गलत जानकारी नहीं देते । एकलव्य क्षत्रिय कुल से था, लेकिन उसका अंगूठा कटवाना उसके गुरुद्वारा #आजतक का सबसे बड़ा गुरुदक्षिणा का उदाहरण माना जाता था , एक लव्य की गुरुभक्ति का व्याख्यान भारत के कोने कोने में दिए जाते रहे हैं एक आदर्श के रूप में। लेकिन पिछले दिनों में इतनी नीचता दिखाई गयी के रावण जो ब्राह्मण था लेकिन कर्मो से राक्षस जाना गया उसे भी 'दलित ' बना दिया गया। हिरण्यकशप राक्षस को भी दलित बना दिया गया , आखिर दलितों को राक्षसों के साथ क्यों जोड़ा जा रहा है ? आंबेडकर तो आर्य बाहर से आये इस बात को सिरे से नकारते रहे हैं ,फिर ये समाज का बंटवारा अब राक्षसों के नाम पे या मूलनिवासी के नाम पे क्यों ? #JNU के विद्वान , ना पढ़ें रामायण -महभारत -गीता - वेद -पुराण लेकिन बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की लिखी पुस्तकें तो ज़रूर पढ़ें। संस्कृत में नहीं अंग्रेजी में लिखी हुई हैं अधिकतर पुस्तकें।
भारत आज नव निर्माण के रास्ते पर है देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है , IIT में जहाँ फीस मुआफी के लिए गरीबी को महत्तव दिया जा रहा है वहीँ व्यापार में दलित और महिलाओं को बढ़ावा देने की मुहीम सरकार ने शुरू पर दी है। लातूर समेत सभी सूखा प्रभावित क्षेत्र प्रधानमंत्री की नज़रों में हैं , देश की सीमाओं पर सुरक्षा चक्र लगवाने में क्वायत शुरू हो चुकी है। किसानो के लिए मंडियां ऑन लाइन हो रही हैं। उनको फसलों के अच्छे दाम मिलेंगे , लेकिन नकरात्मक लोग जातिवाद के खिलाफ बात करते हुए सभी ऐतिहासिक लोगों और वीरों को जाति के आधार पर बाँट रहे हैं।
अगर कोई भी शख्स समाज को तोड़ने या बांटने वालों को ध्यान से देखेंगा तो दंग रह जाएंगा। #आशुतोष ,जी बिलकुल #केजरीवाल स्पेशल, आज #एकलब्य को दलित बता रहा था और #द्रोणाचार्य को अन्यायी। लेकिन दुःख की बात ये है के आशुतोष ने शायद कभी महाभारत नहीं पढ़ी अगर पढ़ते तो एकलव्य के बारे में गलत जानकारी नहीं देते । एकलव्य क्षत्रिय कुल से था, लेकिन उसका अंगूठा कटवाना उसके गुरुद्वारा #आजतक का सबसे बड़ा गुरुदक्षिणा का उदाहरण माना जाता था , एक लव्य की गुरुभक्ति का व्याख्यान भारत के कोने कोने में दिए जाते रहे हैं एक आदर्श के रूप में। लेकिन पिछले दिनों में इतनी नीचता दिखाई गयी के रावण जो ब्राह्मण था लेकिन कर्मो से राक्षस जाना गया उसे भी 'दलित ' बना दिया गया। हिरण्यकशप राक्षस को भी दलित बना दिया गया , आखिर दलितों को राक्षसों के साथ क्यों जोड़ा जा रहा है ? आंबेडकर तो आर्य बाहर से आये इस बात को सिरे से नकारते रहे हैं ,फिर ये समाज का बंटवारा अब राक्षसों के नाम पे या मूलनिवासी के नाम पे क्यों ? #JNU के विद्वान , ना पढ़ें रामायण -महभारत -गीता - वेद -पुराण लेकिन बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की लिखी पुस्तकें तो ज़रूर पढ़ें। संस्कृत में नहीं अंग्रेजी में लिखी हुई हैं अधिकतर पुस्तकें।
भारत आज नव निर्माण के रास्ते पर है देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है , IIT में जहाँ फीस मुआफी के लिए गरीबी को महत्तव दिया जा रहा है वहीँ व्यापार में दलित और महिलाओं को बढ़ावा देने की मुहीम सरकार ने शुरू पर दी है। लातूर समेत सभी सूखा प्रभावित क्षेत्र प्रधानमंत्री की नज़रों में हैं , देश की सीमाओं पर सुरक्षा चक्र लगवाने में क्वायत शुरू हो चुकी है। किसानो के लिए मंडियां ऑन लाइन हो रही हैं। उनको फसलों के अच्छे दाम मिलेंगे , लेकिन नकरात्मक लोग जातिवाद के खिलाफ बात करते हुए सभी ऐतिहासिक लोगों और वीरों को जाति के आधार पर बाँट रहे हैं।

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