लातूर के लिए रेल गाडी द्वारा पानी भेजा जाना सुखद एहसास है। केंद्र सरकार द्वारा देश में किये गए कल्याण के कामों में से एक है। निंदा या प्रलाप करने से कोई भी कठिनाई दूर नहीं होती कर्म ज़रूरी है। यह नियम हमारे आसपास फलता फूलता है लेकिन हम पहचानते नहीं , जीवन भर निठले बैठ कर सिस्टम और बुराइयों को कोस्ते रहते हैं। पर्यावरण बुरी तरह से तहस -नहस कर दिया है पढ़े -लिखे इंसानो ने और मज़ेदार बात है अपनी इस गलती के लिए अधिकतर पढ़े -लिखे लोग दुसरे जानवरों को दोषी मानते हैं। हमारे प्रदेश हिमाचल में तो पिछले दिनों सरकार ने फैसला भी ले लिया की बंदरों को मारने की आज़ादी सभी को है , अगर बन्दर नुक्सान कर रहे हों तो गोली मारने का अधिकार सभी को है। लेकिन उन लोगों को सजा कौन देगा जिन लोगों ने बंदरों के रहने के स्थानों यानि जंगलों को पेड़ बहीन कर दिया ? वोट देने वाले कुछ भी कर सकते हैं , जिन के पास वोट नहीं उनको मौत देने में भी नेता देरी नहीं लगाते। शिमला के आस-पास जंगलों को काट कर सेव के बगीचे भारी संख्या में लगाए गए , अब कोर्ट ने प्रश्न किया , बगीचे काटने का आदेश दिया तो सभी राजनीतिक दल गैर -कानूनी कब्जा धारियों की हिमायत करने लगे। कोर्ट ने भी कब्जाधारियों को कोई सजा नहीं बताई। जो लोग सालों से वन जीवों की भूमि पर अबैध कब्जे करके करोड़ों कमाते रहे उनको सजा और जुर्माना क्यों नहीं ,समझ से परे है।
खैर हमने (मैंने और मेरे छोटे भाई ने )21 फरबरी से गाओं के जंगल में पेड़ लगाने की शुरुआत की है और सप्ताह में एक दिन उनको पानी देने भी जाते हैं। लेकिन अब हम चार लोग हो गए हैं इस काम को करने वाले और चार ही पौधे अब तक रोपित कर दिए हैं पीपल के चार पौधे जंगल में लगाए हैं देखते हैं कब तक हम लोग इस सेवा कार्य को एक मुहीम में बदल पाते हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=X9bcSpgADY0
खैर हमने (मैंने और मेरे छोटे भाई ने )21 फरबरी से गाओं के जंगल में पेड़ लगाने की शुरुआत की है और सप्ताह में एक दिन उनको पानी देने भी जाते हैं। लेकिन अब हम चार लोग हो गए हैं इस काम को करने वाले और चार ही पौधे अब तक रोपित कर दिए हैं पीपल के चार पौधे जंगल में लगाए हैं देखते हैं कब तक हम लोग इस सेवा कार्य को एक मुहीम में बदल पाते हैं।
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