देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है। J N U में कन्हैया बापिस आया और आरएसएस तथा मोदी की भाषा बोलते हुए देश भक्ति की ऊंची -ऊंची बातें कर रहा था। आज तक , abp news , ndtv आदि के स्टूडियोज में तो जैसे रौनक ही लौट आई। इन चेन्नल्स ने कन्हैया को मोदी के बराबर नहीं बल्कि बहुत ऊपर , बड़ा करके दिखाया। खैर जितना मर्जी दिखाया लेकिन कन्हैया के विचारों में आया क्रांतिकारी बदलाव क्यों और कैसे आया ये किसी ने भी नहीं बताया। कन्हैया खुद को भी 'बेचारा ' बताता रहा लेकिन उसके कड़वे और देश द्रोही विचारों पर राष्ट्र भक्ति की चाशनी का राज़ उसने भी नहीं बताया , बल्कि 'लाल-सलाम ' के बुर्के को ओढ़ कर जेल और कोर्ट में पिलाई गई देश भक्ति की घुटी को छुपाने की नाकाम कोशिशि तो की लेकिन गीदड़ तब तक पहचाना नहीं जाता जब तक मुंह ना खोले और जैसे ही वह मुंह खोलता है हुआँ -हुआँ की आवाज़ सारे राज़ खोल देती है। यहाँ भी ऐसा ही हुआ सभी नाटक और बातें एक तरफ, लेकिन देश भक्ति लपलपाती चाशनी में एक गदार के देश भक्ति वाले भाषण ने सारा राज़ खोल दिया। जेल में सेवा तो खूब हुई है पाठे की। कल तक देश की बर्बादी के नारे लगाने वाला आज गरीवी , बेरोज़गारी सहित सभी मुद्दों पे देश की चिंता कर रहा है। एक तरह से मोदी के "सबका साथ सबका विकास " नारे को बुलंद करते गद्दार शिरोमणि अब राष्ट्र भक्ति के नारे लगा रहे हैं। ये बहुत सुखद बदलाब है। 14 -15 दिनों में jnu की गलत शिक्षा पूरी तरह से रफू चक्कर हो गयी। आखिर ऐसा कोनसा ऑपरेशन किया गया जेल में जिसका इशारा जज ने भी किया है। येचुरी,नितीश, केजरी ,राहुल आदि सभी इस बात को छुपा रहे हैं। आखिर जिस ऑपरेशन की बात जज ने सशर्त जमानत देते हुए फैसले में लिखी वो ऑपरेशन वाली बात महान देश भक्त कन्हैया और अफज़ल गुरु गैंग वाले नेता बता क्यों नहीं रहे ? कहीं ऐसा तो नहीं के ऑपरेशन कन्हैया का हुआ लेकिन फायदा अफज़ल गुरु गैंग के सभी गुर्गों को हुआ तभी तो अफजल गुरु की आज़ादी अब गरीवी से आज़ादी में बदल गयी। जो भी हो मोदी ने किया तो चमत्कार ही है , एक गद्दार भी देश में विकास की जरुरत की बात करने लगा। 'अच्छे दिन तो शुरू हो गए भाई !!
How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये
Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है। जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन से तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है। हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है। कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए गए। गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...
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