एक गधी को पुलिस उठा कर ले गयी , उसपर देश द्रोह का केस था। कुछ दिनों बाद वो गधी ज़मानत पे छूट कर बाहर आई तो अपनी साथी गधियों से अलग-अलग रहे। किसी ने पुछा ये व्यबहार में बदलाब कैसे आया तो जवाव मिला ' जब से जेल जा कर आई है इनकी अलग जान पहचान और रुतवा हो गया है ' दुनिया भर के देश द्रोही और गद्दार इनका जेल अनुभव जानने के लिए आ रहे हैं। अब तो ये सेलिब्रिटी हो गई है। पिछले तीन दिनों में दिल्ली का नज़ारा ऐसी ही तस्वीर दिखा रहा है।
एक के बाद एक गद्दार लोग मीडिया में हीरो की तरह बात कर रहे हैं। माहोल ऐसा हो गया है जैसे हिजड़ों के घर बेटे ने जनम ले लिया हो और अब बेटे को चूम -चूम के ही मार देंगे। मीडिया में "गद्दार हीरो और देश सेवा करने वाले शहीद सैनिक जीरो " हो गए। सुकमा में तीन जवानो की शहादत गौण हो गयी मीडिया के लिए। दुःख तो बहुत है लेकिन क्या करें ? शहीद के नाम पर वोट नहीं मिलती और गदार को वोट मांगने के लिए आर्डर भी मिल गए। हमारे संबिधान की सुंदरता देखिये गदार राजनीति कर सकता है लेकिन सैनिक गद्दारों को मार नहीं सकता अगर सैनिक ऐसा करेगा तो गद्दारों के अधिकारों का हनन और जब सैनिकों की जान चली जाती हैं तो सफ़ेद ख़ामोशी पसर जाती है , कोई अधिकारों के हनन की बात नहीं करता। एक विश्व विद्यालय देश से भी ऊँचा हो गया।
लेकिन बदलाब की रफ़्तार देखिये , मोदी सरकार की टँकार देखिये गद्दार जैसे ही जेल से छूटा अफज़ल गुरु से अनजान हो गया और गरीबी ,भुखमरी ,असमानता , आरएसएस ,बीजेपी और मोदी भारत को आज़ाद करवाने की ज़िद करने लगा है। आज ख़ुदकुशी करने वाले किसान उसे शहीद दिखने लगे ! मतलब ऐसा कोण सा टीका लगाया गया जिसके प्रभाव से गद्दार के सुर बदले-बदले हैं। गद्दार अब गरीब समाज सैनिक बनाया जा रहा है, कम्युनिस्ट विचार धारा से ओत -प्रोत हुए गद्दार को जेल में किस ऑपरेशन से गुज़ारा गया के उसने दवी जुबां में ही सही 'सत्य मेव जयते ' का पाठ शुरू किया। ज़ी न्यूज़ इस पूरे नौटंकी में सबसे सटीक खबरिया चेन्नल बन कर उभरा है देखना होगा ये निष्पक्षता कब तक चल पाती है।
एक के बाद एक गद्दार लोग मीडिया में हीरो की तरह बात कर रहे हैं। माहोल ऐसा हो गया है जैसे हिजड़ों के घर बेटे ने जनम ले लिया हो और अब बेटे को चूम -चूम के ही मार देंगे। मीडिया में "गद्दार हीरो और देश सेवा करने वाले शहीद सैनिक जीरो " हो गए। सुकमा में तीन जवानो की शहादत गौण हो गयी मीडिया के लिए। दुःख तो बहुत है लेकिन क्या करें ? शहीद के नाम पर वोट नहीं मिलती और गदार को वोट मांगने के लिए आर्डर भी मिल गए। हमारे संबिधान की सुंदरता देखिये गदार राजनीति कर सकता है लेकिन सैनिक गद्दारों को मार नहीं सकता अगर सैनिक ऐसा करेगा तो गद्दारों के अधिकारों का हनन और जब सैनिकों की जान चली जाती हैं तो सफ़ेद ख़ामोशी पसर जाती है , कोई अधिकारों के हनन की बात नहीं करता। एक विश्व विद्यालय देश से भी ऊँचा हो गया।
लेकिन बदलाब की रफ़्तार देखिये , मोदी सरकार की टँकार देखिये गद्दार जैसे ही जेल से छूटा अफज़ल गुरु से अनजान हो गया और गरीबी ,भुखमरी ,असमानता , आरएसएस ,बीजेपी और मोदी भारत को आज़ाद करवाने की ज़िद करने लगा है। आज ख़ुदकुशी करने वाले किसान उसे शहीद दिखने लगे ! मतलब ऐसा कोण सा टीका लगाया गया जिसके प्रभाव से गद्दार के सुर बदले-बदले हैं। गद्दार अब गरीब समाज सैनिक बनाया जा रहा है, कम्युनिस्ट विचार धारा से ओत -प्रोत हुए गद्दार को जेल में किस ऑपरेशन से गुज़ारा गया के उसने दवी जुबां में ही सही 'सत्य मेव जयते ' का पाठ शुरू किया। ज़ी न्यूज़ इस पूरे नौटंकी में सबसे सटीक खबरिया चेन्नल बन कर उभरा है देखना होगा ये निष्पक्षता कब तक चल पाती है।

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