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And India Divided ! / बांटो और राज करो !

पिछले काफी समय से भारत में अलप संख्यक अपीजमेंट की राजनीति होती रही है । लेकिन हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद शांत रहे या बोला  जाए कि उदासीन रहे, उनको कभी भी एक सुर में किसी भी बात का विरोध करते नहीं देखा गया।  अभी भी ऐसा ही है हिन्दू एकता में कोई बिकास नहीं हुआ कुछ वर्ष पहले आमिर खान अभिनीत 'P.K " फिल्म में हिन्दू धर्म पर समूल रूप से कुठारा घात किया गया था ,मज़ाक उड़ाया गया था लेकिन कहीं भी हिन्दुओं में रोष उत्पन नहीं हुआ जबकि भगवान् भोले नाथ को हसीं का पात्र बनाया गया था।  फिल्म रिलीज़ ही नहीं हुई अपितु कीर्ति मानो के साथ कमायी करने वाली फिल्मो की लिस्ट में शामिल हो गयी।   उधर ताज़ा उदाहरण 'पद्मावती ' है जो राजपूत गरिमा के खिलाफ मानी जा रही है और चारों तरफ भारी बिरोध हो रहा है , वो बात अलग है कि फिल्म अभी रिलीज़ भी नहीं हुई है।  ऐसे कई उदाहरण हैं हमारे देश में जब हिन्दू धर्म से बढ़ कर जातियों ने देश और समाज को बाँट दिया।  सभी धर्मो में ,पूरी दुनिया में ऐसा ही तांडव है।  खैर बात भारत की करें तो पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा  हैं , अगर किसी फिल्म में सिख किरदार मुख्य भूमिका  में है तो सिखों के धर्म गुरु और नेताओं से आज्ञा ली जाती रही है और फिल्म निर्माण के बाद सिख संगठनों के नेता फिल्म देख कर फिल्म को पास या फेल करते रहे हैं ,ऐसा ही कामोवेश मुस्लिम धर्म से व्यवहार होता रहा है , यही नहीं कई बार फिल्म में मुस्लिम आतंकी दिखाने पे भी विरोध हुआ और फिल्म में कांट -शाँट करनी पड़ी। ये रीति चलाने वाले लोग ऐसी सोच नहीं रखते थे की हिन्दू धरम के लोग कभी असहिष्णु हो जाएंगे।  बात सही भी है आज तक किसी भी फिल्म का बिरोध हिन्दू धर्म के लोगो  ने एक जुट होकर नहीं किया।  लेकिन जातियों के नाम पर कई बार बिरोध और प्रदर्शन हुए हैं , सिर्फ फिल्मो तक ही ये विरोध नहीं रहे है ,देश के अलग -अलग राज्यों में जाति आधारित रिज़र्वेशन की मांग गुजरात , हरियाणा आदि भा ज पा शासित प्रदेशों में बिकराल रूप ले रही है।  ये उठापटक समाज को मिस लीड करने वाले नेताओं और राजनैतिक सफलता प्राप्त करने वाले दलों की कठ पुतली बना कर रख देगी , लेकिन फ़िक्र किसे है।  खैर , आज फिर हिन्दुओं को जाति के आधार पर बांटने की साजिश थोड़ी सी सफल होती दिखाई दे रही है और गुजरात के चुनाव परिणाम  देश की राज निति की दिशा और दशा निर्धारित करदेंगे।  अगर कांग्रेस जीती तो हिन्दुओं को जाति के आधार पर बांटने का उनका खानदानी पैंतरा पूरे देश में आज़माया जाएगा और अगर बीजेपी साख बचाने में कामयाव हुई तो देश के चुनाव फिर से तरक्की और काम पर आधारित हो जाएंगे।  जो भी हो अपीजमेंट की राजनीति कोई भी करे देश के लिए घातक है 

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