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हिन्दू जनता के मन में पी के फिल्म के विरोध में रोष है लेकिन नेता गायब हैं by amit vashist

हिन्दू पहले भी ठगे गए थे आज भी ठगे गए हैं , वीर सबरकर के नाम पर वोट मांगने वाले भगवान् शंकर की बेईज़ती को तूच्छ मान कर घरों में दुबके बैठे हैं वीर सावरकर प्रथम भारतीय छात्र जिन्हें देश भक्ति के आरोप में निष्काषित किया गया। प्रथम युवक जिन्होंने विदेशी वस्त्रो की होली जलाई। प्रथम बैरिस्टर जिन्हें प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। प्रथम भारतीय जिन्होंने 1857 को स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया। प्रथम लेखक जिनकी पुस्तक प्रकाशन के पहले ही जप्त कर ली गई। प्रथम कैदी जिन्होंने अंडमान की जेलों में कील की लेखनी से साहित्य सृजन किये। प्रथम मेधावी जिन्होंने काला पानी की सजा काटते हुए भी दस सहस्त्र पंक्तियों को कंठस्थ कर सिद्ध किया की अदि काल में वेदों को किस प्रकार जीवित रखा गया।
प्रथम राजनितिक नेता जिन्होंने संसार के समक्ष भारत को हिन्दू राष्ट्र सिद्द कर गाँधी जी को चुनौती दी।
प्रथम क्रन्तिकारी जिन पर स्वतंत्र भारत की सरकार ने जूठा मुकदमा चलाया और बाद में निर्दोष साबित होने पर माफ़ी मांगी।

ऐसे महापुरुष को शत शत नमन करने वाले संगठन और राजनीतिक पार्टी द्वारा हिन्दू विरोधी फिल्म पी के के विरोध में एक शव्द का ना निकलना येही सिद्ध करता है के कुर्सी से बड़ा कोई नहीं .
हिन्दू सरकार के नाम पर वोट मांगने वाले लोग सत्ता मे आते ही सेक्युलर हो गए
लेकिन जनता सब जानती है , पांच साल बाद फिर चुनाब हैं देखना होगा के हिन्दू समाज बीजेपी और आरएसएस का विश्वास घात याद रख पता है या भूल जाता है . साधारण हिन्दू जनता के मन में पी के फिल्म के विरोध में रोष है लेकिन नेता गायब हैं

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