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बवासीर या पाइल्स या Hemorrhoid / मूलव्याधि



  1. बवासीर या पाइल्स या Hemorrhoid /  मूलव्याधि आदि नामों से जानी जाने वाली दर्दनाक और खतरनाक बिमारी अघिकतर हमारे गलत रहन -सहन ,गलत खान-पान और गलत व्यवहार के कारण होती है,हो सकता है कि ये आपको अटपटा लगे लेकिन सच यही है।  अगर किसी भी मनुष्य को ठीक से रहना , बैठना और कहना आ गया तो ये बिमारी कभी भी आपके शरीर को अपना शिकार नहीं बना सकती क्योंकि  इस  बिमारी   की जड आपका खराब पेट ही माना जाता है , चाहे कब्ज हो  या फिर बार -बार शौच जाने की आदत बवासीर या पाइल्स के सबसे बडे कारक यही माने जाते हैं।  बढ़ती उम्र से भी इसका कारण हो  सकती है।  कई लोगों को शौक होता है शौचालय  में इंग्लिश सीट के ऊपर बैठ कर अखवार या  मैगज़ीन पढने का ,तो कई लोग  मोबाइल लेकर शोचालय में काफी समय विताते हैं ऐसे लोगों  को भी बवासीर अपना शिकार बनाती है। शौच के बाद अगर ठीक ढंग से गुदा की सफाई ना हो तो बवासीर हो सकती है।   गर्भवती महिलाओं को भी ये बिमारी घेर सकती हैं लेकिन डलिवरी के बाद ये समस्या खत्म हो जाती है सही खान -पान और दिन चर्या से। 

इस बिमारी को नामुराद बिमारियों कि श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि ये बहुत ही कष्ट कारक बिमारी है। इस बिमारी के परिणाम स्वरुप गुदा (anus )के अंदर तथा बाहरी हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है , कुछ समय बाद वही सूजन मस्सों का रूप ले लेती है। ये मस्से कई बार दर्द  का कारण बनते हैं और कई बार इनमें से रक्त स्राव भी होता है। शौच जाने पर अगर कोई ज़ोर लगाता है तो गुदा के अंदर बने हुए मस्से बाहर आ जाते हैं तब स्थिति और भी कष्ट कारक हो जाती है। ये बिमारी एक जनरेशन से दूसरी जनरेशन को भी जाती है अर्थात वशांनुगत रोग (hereditary disease) के रूप में भी जानी जाती है। 

पाइल्स से मिलती जुलती बिमारी है फिशर ,  दोनों बिमारियां गुदा से सम्बंधित होने के कारण भ्र्म पैदा करती हैं। इस भ्रम को दूर करने के लिए या तो  डॉक्टर की सलाह लें  या फिर फिशर और पाइल्स पहचान सीख लें। फिशर में गुदा यानी anus में कट या क्रैक लग जाता है जिस कारण फिशर के रोगी को भी रक्त स्राव और दर्द दोनों होते हैं परन्तु पाइल्स में मस्से बनते हैं यही आसान सा तरीका है फिशर और पाइल्स को पहचानने का। 


बवासीर के लक्षण -

शौच जाने पर मल के साथ म्युकस या रक्त का आना। गुदा के आस-पास गाँठ  करना या फिर सूजन का अनुभव करना। गुदा द्वार पर और गुदा के आस-पास खुजली अनुभव करना। शौच जाने के बाद भी गुदा द्वार पर भार का अनुभव करना कि फिर से शौच जाना चाहिए। गुदा द्वार पे तथा आसपास छोटे -छोटे मस्सों का उभरना, बैठने और चलने में कठिनाई आती है।  

  1. इलाज -
बवासीर  के बहुत कम मामले ऐसे होते हैं, जिनमें सर्जरी की जरूरत होती है। अधिकतर  बवासीर दवाओं से ही ठीक हो जाती है । एक से दो महीने तक लगातार इलाज करने से पाइल्स की समस्या को खत्म किया जा सकता है। नीम , जिमीकंद ,यष्टिमधु ,हरितकि ,घृत कुमारी  ,मुक्ताशुक्ति भस्म ,अरिष्टक ,शुद्ध सफटिका तथा रसवंती आदि जैसे उत्तम आयुर्वेदिक पदार्थों को निश्चित मात्रा  मिश्रित करके दवाई के रूप में त्यार करके उपयोग किया जा सकता  है। हज़ारों लोग इन का  प्रयोग करके बवासीर से छुटकारा पा चुके हैं। आपको याद रखना होगा की बवासीर को आयुर्वेदिक् जड़ी -बूटियों द्वारा ख़त्म किया जा सकता और खुशहाल जीवन फिर से जिया जा सकता है। 

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