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क्या दिल्ली सरकार उनकी आवाज़ सुनती है ?


3 दिसम्बर 1984 को भारत के भोपाल नामक शहर में जहरीली गैस की चपेट में आने से 35 हजार लोग मारे गए थे और 572000(पांच लाख बहतर हज़ार ) के करीब बुरी तरह से घायल हुए थे लेकिन आज तक जो मुआवजा भोपाल गैस काण्ड पीड़ितों को मिला है वो है 25000 रूपये प्रतेक मरने वाले की मौत की कीमत थी 25000 रुपये . साथ ही मुख्य आरोपी को भारत के नेताओं ने गुपचुप ढंग से देश से भगा दिया . मित्रो भारत के सुप्रिम कोर्ट ने ही तो भारत के भोपाल में गैस काण्ड मे मारे गए हर व्यक्ति की मौत की कीमत तय करी थी , जय हो भारत के नेताओं की तथा जजों की , आपको बिलकुल ध्यान देना होगा मित्रो अगर आप लोग अब भी नहीं जागे तो नेता और क़ानून दोनों मिलकर मौतों का सस्ते में सौदा करते रहेंगे . सरकारे बदल जाती हैं लेकिन जनता हमेशा की तरह सो जाती है , अब ऐसा नहीं चलेगा अगर आप चाहते हैं के आपके बच्चे , भाई-बहन , माता-पिता ज़िंदा रहें सुरक्षित रहे तो सोना नहीं है ,ऐसे ही किसी की हां में हाँ ना मिलाओ जागो और जगाओ . पीपल के पेड़ लगाओ , जब सूरज डूब जाता है तब सभी पेड़ कार्बन-डाइऑक्साइड छोड़ना छुरू कर देते हैं लेकिन पीपल एक ऐसा पेड़ है जो 24 घंटे ओक्सिजन देता है अब आप खुद फैसला करे कोण सा पेड़ लगाना ज़रूरी है , लेकिन एक बार ज़रूर सोचियेगा के हमारे देश में एक मरे हुए व्यक्ती की कीमत 25000 हजार से जादा नहीं है अगर मारने वाला विदेशी है तो और अगर कोई जनता को अकल की बात बताता है उसे नेता और क़ानून फंसाता है उदहारण बापू आसाराम है , मीडिया-कानून –नेता आज की बात नहीं हमेशा से ही ऐसा ही हुआ है लेकिन मृत-प्राय रह कर जीने से अछा है गलत के खिलाफ आवाज़ तो उठायें , लेकिन संत गोपाल दास को आवाज़ उठाने पे जेल और लात ही मिली , खैर उनको आँख चुरा कर नहीं जाना पडेगा वे बोल तो सकते है ना के मैंने विरोध करा , लेकिन बोलेंगे कब ,, क्या दिल्ली सरकार उनकी आवाज़ सुनती है ?????????????????????????????????????????हाहाह

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