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सत्य मेव जयते /satya meve jayte by Amit Vashist

देसी गौ के मूत्र को पेटेंट करवाया अमेरिका ने लेकिन भारत सरकार भारत में बिदेशी गौ( बिलायती) के पालन को प्रोत्साहित कर रही है क्यों ?? देसी गौ  के पालन को प्रोत्साहित करने की बजाये सूयरी और बैल के मेल से तैयार की गयी बिलायती गौ के पालन को इस देश में प्रोत्साहित किया कांग्रेस सरकार ने  . मजेदार बात बताऊँ तो आप भी सहमति जताएंगे . भारत पुराने समय से ही गौ-पालक देश रहा है , सभी देवताओं ने गौ को माता का दर्जा दिया है लेकिन1947 के बाद देश को आजादी मिलने के बाद सेकुलरिज्म की हवा ने भारत में गौ-माता का दर्जा घटा कर कसाइयों के लिए भेड -बकरिओ  की तरह  गौ-मांस के लिए एक जानवर तक सीमित कर  दिया . ये गलत था लेकिन जिन लोगों ने इस के खिलाफ बोला उनका मुंह बंद कर दिया गया या तो डरा कर या फंसा कर . जनता तो रोटी-कपड़ा और मकान की जद्दो -जहद में ही पिसती रही है हमेशा से. इस बात का लोगो को भान ही नहीं रहा के किस तरह से गहरी साजिश के तहत भारत की "जीवन रेखा" मानी जाने वाली देसी "गौ" को जड़ से ख़तम करने के लिए अमेरिका और  यूरोप  ने जुगत लगा दी है . आप खुद सोचिये ना , जिस गौ के मूत्र को अमेरिका पेटेंट करवा रहा है  उसी  गौ को भारत से साफ़ करवाया जा रहा है. आज़ादी के समय भारत में चालीस करोड गौ वंश था अब सिर्फ चार करोड़ रह गया है , क्यों? इस चाल के खिलाफ राजीव दीक्षित जी ने भी आवाज़ उठाई और परिणाम  स्वरुप  मौत मिली , दीक्षित जी खूब टेस्ट किये थे देसी गौ पे, फिर आवाज़ उठाई थी . लेकिन बापू आसाराम इस समय नए शिकार हैं इस खेल के . बापू आसाराम वो पहले शख्स हैं जिन्होंने बिलायती गौ के दूध से होते नुक्सान के बारे में जनता को बताना शुरू किया , देसी गौ के गोबर तथा मूत्र  के फायदे जन जन तक पहुंचाने शुरू किये , उनके आश्रम से गौ-चन्दन नामक धुप देसी गौ-के गोबर से बनाया गया और आप जान कर दांतों टेल उंगली चबा लेंगे के उस धुप के धुएं से डिप्रेशन ढीक हुआ है लोगों का , गौ-मूत्र के प्रयोग से लोगो का दमा ,टी बी ,केंसर , गठिया आदि अनंत बीमारिया ठीक होनी शुरू हो चुकी थी . बापू आसाराम के ऊपर पूरी रिसर्च करने के बाद ही मैं ये हिम्मत जुटा पा रहा हूँ के देश वसीयो के सामने बापू आसाराम के बारे में सच बताऊ . बापू आसाराम भारत में पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने सूयरी और बैल के मेल से तैयार की गयी बिलायती गौ के पालन को इस देश में प्रोत्साहित करने के लिए नेताओं और सरकारों को खरी-खोटी सुनाई . मित्रो सच तो ये है के अगर हमारे घर आंगन में देसी गउ  है तो डॉक्टर के पास जाने की जरूरत बहुत ही कम रह जाती है , अगर आपके घर में बिमारी नहीं होगी तो नुक्सान किसका होगा सोचो जी बिलकुल दवाई कम्पनी का और दवाई कम्पनी किन देशो की हैं ??? दूसरा देसी गौ के कारण वातावरण शुद्ध रहता है जिसका सबसे बड़ा फायदा होता है हमारे घरो में छोटी छोटी बात पे लड़ाई नहीं होती क्योंकि गुस्सा तो गंदे वातावरण के कारण आता है और गौ-माता वातावरण शुद्ध कर देती है , जी अब आप समझ रहे है के भारत में देसी गौ को कसाई से मरवाने से किसका फायदा है और बिलायती गौ को बढ़ावा देने से किसका फायदा है , अब लिखूंगा खूब आपसे प्रर्थना है मेरा होसला बढाते रहे ,गलती बताते रहे  

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