अब सवाल पैदा होता है के वो कोण लोग हैं जो गौ-हत्या करवा रहे है तथा भारत सरकार पे दवाब बनवा के ऐसा करवा रहे हैं. भारत के जितने भी राज्य गौ-हत्या को दंडनीय अपराध मानते हुए गौ-रक्षा के लिए क़ानून ले कर आये हैं ,कडवा सच ये है के वे क़ानून कितवो तक ही रह गए है , उदाहरण के लिए पंजाब में गौ-हत्या दंडनीय अपराध माना गया और अकाली सरकार इस कानून का श्रेय ले सकती है और उनको श्रेय जाता भी है , लेकिन क्या गौ-हत्या और तस्करी बंद हो गयी पंजाब में ??????? आप सभी समझदार हैं मित्रो पंजाब-हिमाचल से होते हुये तस्कर गौ को गाडियों में भरकर हरयाना में लाते है और फिर उत्तर प्रदेश में गौ-माता गौ-मांस में तब्दील करके सरकारी सब्सिडी पर विदेशो में सफ़र कर जाती है. अब बात चली है तो एक प्रश्न और उठता है अगर बुरा न लगे तो आपके सामने ला रहा हूँ वो प्रशन :--
“जब रसोई गैस के लिए दी जा रही सब्सिडी खतम करने की सिफारिश की जाती है अलग अलग कमेटियों द्वारा तब क्यों कोई भी पढा लिखा भद्र पुरुष या संगठन या राजनीतिक दल गौ-मांस के व्यापारियों को दी जा रही सरकारी सुविधाओं और सब्सिडी पे प्रशन उठाता ??????????”
इस बात का जवाब आप अपने आप से पूछें , आँखे ना मोड़ें सचाई से कब तक अपने आप से झूठे संतोष और तरक्की की सांत्वना देते रहेंगे , कभी - कभी अपने साथ तो इमानदार होना हर ज़िंदा जीव का अधिकार है ! सोचिये , क्यों कोई भी सरकार गौ-हत्या करने वाले क़त्ल खानों को बंद करने का आर्डर पास करती ? कोई भी एक राजनीतिक दल जिसने कडा रुख अख्तियार किया हो बिलायती गौ (सुअरी और बैल के मेल से तैयार अमेरिकन नकली गौ ) को प्रत्साहन बंद करने के पक्ष में ? क्यों नहीं देसी गौ-पालन को प्रोत्साहित किया जाता ?? जबकी देसी गौ के दूध के साथ साथ मूत्र और गोबर भी भारी आमदनी का ज़रिया है I
अछा एक और चीज़ बड़ी महत्व पूरण है राजनितिक दल तो छोडिये कितने संत –बाबा वर्तमान में हैं जो देसी गौ का सम्मान तो करते है लेकिन बिलायती गौ के दूध से होते नुक्सान को भी जनता को बताते हैं और सरकारों को लताड़ते हैं ? दोस्तों मेरा मकसद सनसनी फैलाना नहीं है मेरा मकसद है मेरा मकसद है विचार-पूर्ण बहस छेड़ना , और कोई मकसद नहीं मेरा. जब मैंने इन प्रश्नों के उत्तर ढूंढें तो एक ही नाम बार बार उभर करके आया और वो नाम है बापू आसाराम जी का .
बापू आसाराम जी ने अपने सत्संगों में ये बाते बार बार दोहराई और अपने साधको को हिदायत देते रहे हैं के देसी-गौ को बचाओ ,देसी गौ की पूजा ही नहीं पालन भी करो अगर आप घर पे गौ-माता को पाल नहीं सकते तो गौ-शाला में नियमित रूप से जाकर सेवा भी करो और दान भी दो .
हाँ आप ये कह सकते हैं आज के जमाने जहाँ मरने की फुरसत नहीं है मैं आपको बेमतलब का ज्ञान बाँट रहा हूँ लेकिन मित्रो ये देसी-गौ की हत्या का मुद्दा आपके परिवार से भी जुडा हुआ है , आज जब हर घर में खाने से ज्यादा पैसा दवाइयों पे खर्च हो रहा है तो आपको सोचना तो पडेगा ना . कुछ साधारण शब्दों में बात पूरी करता हूँ :- देखिये देसी गौ अगर जहर भी खाती है तो उसके दूध में जहर का प्रभाव नहीं आता , कुछ भी जहरीला अगर देसी गौ-माता खा ले और हम उसका दूध पी लें तो हमे कोई नुक्सान नहीं होता इसके बिपरीत अगर कोई इंसानी माँ ज्यादा मिर्ची भी खाले तो उसका प्रभाव दूध पीने वाले बच्चे पे साफ़ दिखता है ये तो मानते हैं आप , लेकिन देसी गौ यहाँ सभी जीवों से ऊपर है ये गूढ़ रहस्य बापू आसाराम जी समझ चुके थे यहाँ पर मैं बता दूँ देसी –गौ का संरक्षण सिर्फ एक हिस्सा है बापू आसाराम जी को फंसाने का और भी कई कारण है आने वाले दिनों में सारी बाते आपसे शेयर करूंगा , दुखदायक पक्ष ये है के भारत की जनता इस दाव-पेंच के खेल में अनजाने में ही बापू आसाराम को खलनायक समझ रही है . सोचो भाई आपकी गौ खुद तो जहरीली दवाइयो और रसायनिक खादों से उगाया हुआ अन खाती थी लेकिन आपको शुद्ध दूध देती थी , गौ खुद बीमार हो जाती थी लेकिन उसका दूध पीने वाले को कोई नुक्सान नहीं होता था , जब आपको शुद्ध दूध मिल रहा हो तो किसका नुक्सान होता होगा ??? यकीनन दवाई कंपनियों का क्यों गलत तो नहीं कहा , हमारे देश में पिछले 15-20 सालों में किडनी ,दिल,शुगर , डिप्रेशन ,कैंसर ,पेट ,यूरिक एसिड , एसिडिटी लिस्ट बहुत लम्बी बन जाएगी लेकिन शायद समझने में कठनाई नहीं आएगी के 125 करोड़ लोगों का देश अगर बीमार नहीं होगा तो अमेरिका-यूरोप का बिज़नस कैसे चलेगा ? सिर्फ एक देसी गौ अगर आपके घर में हो तो 60 से 70 % बीमारिया आपके परवार को छू भी न सकें , ये बात आसाराम बापू ने इस देश की जनता को समझानी शुरू करदी थी और देसी गौ-की हत्या तो क्या रुकवानी थी आज बापू जेल में और गौ-हत्या बिना रुके जारी है . अगर क़त्ल खाने ही बंद हो जायेंगे तो क्या 90 % तक गौ ह्त्या अपने आप बंद नहीं हो जायेगी आप खुद बोलिए !! ये बात हमारे प्रधान सेवक आदरणीय नरेंदर भाई मोदी पूर्ण रूप से जानते हैं लेकिन कुछ क्र नहीं पा रहे क्यों ????? आखिर कोई तो दवाव है मोदी भाई पे के मोदी जी इस मुद्दे पे काम तो छोड़ो बात भी नहीं कर पा रहे “ पिंक क्रान्ति “ को बंद करवाना मोदी जी का सर्वोपरी सपनो में से था लेकिन चाह कर भी भारत सरकार गौ-मांस निर्यातको की सब्सिडी बंद नहीं करवा पा रही है तो ये समझने में देर नहीं लगनी चाहिए के पुरानी सरकारों ने कुछ तो किया है जिससे आज मोदी भाई भी गमजदा हैं इस मुद्दे पे . मैं जानता हूँ के उनको खुद को भी बेबसी महसूस होती होगी लेकिन हाथ बंधे हुए हैं . अगर ऐसा कुछ है तो भारत की जनता को खुल के बताएं ,उनकी एक आवाज़ पे पूरी दुनिया खिंची चली आती है . बस एक बार बोले के विदेशी दवाव है देखिये मोदी जी कैसे पूरा देश आपके साथ खड़ा हो कर हर दवाव को हटा देगा
How to Learn New Things or Tough Subjects Successfully ?मतलब ये है कि आप अपने बचपन में लौट जाइये अर्थात बच्चे बन जाइये
Love Is The Only Medicine For This World जानवरों तथा मनुष्यों का सीखने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है। जीवों के सीखने की प्रक्रिया ,'कोशिश और गलती अर्थात trial and error ' नियम पर आधारित होती है । सीखने वाले के लिए शुरूआती प्रयत्न किसी विज्ञानिक प्रयोग से कम नहीं होते। प्रारंभिक छोटी -छोटी कोशिशों से मनुष्य को सफलता के रास्ते की कठिनाइयों तथा अपनी कमियों का पता चलता है ,जिनको दूर करने के प्रयत्न वह आरम्भ कर देता है। शुरुआती प्रयत्न इतना तो समझा ही देते हैं कि वे कौन से तरीके हैं जिनसे लक्षित क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं हो सकती और वह नए तरिके अपना कर अपनी कोशिशों को नए आयाम देना भी आरम्भ करदेता है। सीखना मानसिक दक्षता का आधार है। हर सीखने वाले की दक्षता अलग -अलग होती है अतः सीखने के लिए कितना समय लगता है यह भी हर किसी की दक्षता पर ही निर्भर करता है। कौरव तथा पांडव गुरु द्रोणाचार्य जी के आश्रम में शिक्षा के लिए गए। गुरु जी ने पहला पाठ पढ़ाया "सदा सच बोलो " | अगले दिन गुरु जी ने पाठ सुनाने को कहा तो सिवाए युधिष्ठिर के सभी ने पाठ रट कर सुना...
Comments