Skip to main content

Posts

Media world wide

It is sad practice of media world wide , what they want to teach the whole world, what massage they want to convey by dividing # daughters ?? India's daughter or daughter of England or Britain. What is the difference between daughters of both nations ?? The topic should be how to protect daughters world wide, but unfortunately they are playing divide and rule policy and game to damage image of nations on such issues. Rather we should come together to solve the problem. In India there was a practice of mutual responsibility of society towards kids and daughters particularly but under the influence of modern thinking of me and my this practice is lost . On other hand if a well wisher tries to keep check on kids it becomes breach of personal life of kids,. The recently in America ,USA a girl tried to kill her mother just because she took I-phone back . It is a clear massage to all of us it is a massage to the whole universe if we will not unite to consider our kids being mutual respon...

MOBILE GANG OF INDIA

देश के नागरिकों को रोज़ 1-2-5-10-50-100 रूपये का चूना लगा कर प्रॉफिट बडा रही हैं मोबाइल कंपनियां , कांग्रेस द्वारा सिस्टम को किस प्रकार नकारा और वेअसर कर दिया गया के साधारण भारतीय नागरिकों के पैसे चोरी से काट लेती हैं ये कम्पनियाँ और ग्राहक नहीं जानता अब अपनी मजबूरी किसे बताये ,मीडिया तो इन कोम्पनियोंम की जेब में होता है कोई भी साधारण जनता की इस कठिनाई को सरकार के सामने नहीं लाता लेकिन देखना होगा के मोदी सरकार कब तक सिस्टम को ठीक कर पाएगी जिससे जनता के पैसे की खुली लूट बंद हो सके http://youtu.be/eyuqdUU3IKU

हिन्दू जनता के मन में पी के फिल्म के विरोध में रोष है लेकिन नेता गायब हैं by amit vashist

हिन्दू पहले भी ठगे गए थे आज भी ठगे गए हैं , वीर सबरकर के नाम पर वोट मांगने वाले भगवान् शंकर की बेईज़ती को तूच्छ मान कर घरों में दुबके बैठे हैं वीर सावरकर प्रथम भारतीय छात्र जिन्हें देश भक्ति के आरोप में निष्काषित किया गया। प्रथम युवक जिन्होंने विदेशी वस्त्रो की होली जलाई। प्रथम बैरिस्टर जिन्हें प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। प्रथम भारतीय जिन्होंने 1857 को स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया। प्रथम लेखक जिनकी पुस्तक प्रकाशन के पहले ही जप्त कर ली गई। प्रथम कैदी जिन्होंने अंडमान की जेलों में कील की लेखनी से साहित्य सृजन किये। प्रथम मेधावी जिन्होंने काला पानी की सजा काटते हुए भी दस सहस्त्र पंक्तियों को कंठस्थ कर सिद्ध किया की अदि काल में वेदों को किस प्रकार जीवित रखा गया। प्रथम राजनितिक नेता जिन्होंने संसार के समक्ष भारत को हिन्दू राष्ट्र सिद्द कर गाँधी जी को चुनौती दी। प्रथम क्रन्तिकारी जिन पर स्वतंत्र भारत की सरकार ने जूठा मुकदमा चलाया और बाद में निर्दोष साबित होने पर माफ़ी मांगी। । ऐसे महापुरुष को शत शत नमन करने वाले संगठन और राजनीतिक पार्टी द्वारा हिन्दू विरोधी फिल्म पी के के विरोध में एक ...

यमुनानगर में तेज़ हुआ फिल्म पी के का बिरोध by Amit Vashist

यमुनानगर में तेज़ हुआ फिल्म पी के का बिरोध कल जिला अधिकारी को नोटिस दे कर फिल्म बंद करवाने की मांग की थी हिन्दू संगठनों ने , लेकिन फिल्म बंद नहीं हुई. आज सिनेमा हाल के सामने किया प्रदर्शन लगाया जाम हिन्दू समाज के नेता उतरे सडको पर , सिनेमा हाल के सामने किया प्रदर्शन , सडक पर बैठ कर किया हनुमान चालीसा का पाठ हिन्दुओं में भारी रोष . शान्ति पूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए भारी संख्या में स्थानीय लोग . अब अगर फिल्म चलती है तो सिनेमा हाल में तोड़ फोड़ और प्रदर्शन के लिए होगा प्रशासन जिमेदार –गगन प्रकाश (हिन्दू नेता ). बी जे पी ने प्रदर्शन से किया किनारा ना कोई नेता ना ही कार्यकर्ता हुआ प्रदर्शन में शामिल , हिन्दू नेता इंतज़ार करते रहे कोई नहीं आया ,जिले के चारों विधायको में से कोई नहीं पहुंचा हिन्दू नेता महसूस कर रहे हैं ठगा हुआ

Hindu verses Secular Saints and Media /मीडिया हिन्दू संतो को पाखंडी और धर्म परिवर्तन करवाने वालों को महान क्यों कहता है

क्या कारण है ये मीडिया हिन्दू संतो को पाखंडी और धर्म परिवर्तन करवाने वालों को महान कहता है :- 2 आर्टिकल अंग्रेजी में लिखे हुए आप से शेयर कर रहा हूँ संक्षिप्त रूप में और उनके लिंक भी दे रहा हूँ अंग्रेजी में हैं जरूर पढ़ें , दोनों में संतों के बारे में बात की गयी है , एक आर्टिकल में इसाई संत फ्रांसिस क्सेविएर के बारे में बताया गया है , फ्रांसिस गोवा में 6 mayee 1542 को उत्तरे थे और 10 वर्ष बाद उनका देहांत हो गया था 3 दिसम्बर 1552 को ,लेकिन उनका वेजान शरीर गोवा में आज भी पड़ा हुआ है , उनके शारीर से एक हाथ अलग करके रोम लेजाया गया है जनता के दर्शन के लिए , संत फ्रांसिस को महान बोला गया क्योंकि उनहोंने 3 लाख से जादा लोगों का धरम परिवर्तन सिर्फ 10 साल के छोटे से समय में करवा कर इसाई बनवाया था , इस लेख के लेखक का नाम है डेनिस कोडी विदेशी हैं लेकिन गोवा में इसाई संत के किये कार्यों से खुश हो क्र उनको याद भी करते हैं और दुनिया को छाती चोडी करके बताते भी हैं के कैसे इसाई संत ने 3 लाख लोगों का धरम परिवर्तित किया और कैसे उनका मृत शरीर आज भी ४५० साल बाद भी दुनिया की आस्था का केंद्र बना हुआ है http:...

Hindu Dharam Veer Haqiqat Rai/धर्म वीर हकीकत राय

धर्म वीर हकीकत राय(ये कविता मेरी नहीं है , इस कविता को लिखा है धर्मदेव जी ने ) धन्य धन्य तुम वीर हकीकत , धन्य तुम्हारा था बलिदान। प्राण गवाये धर्म न छोड़ा, रख ली आर्य जाती की शान।। शस्त्र न कोई इस दुनिया में, जो आत्मा को काट सके। यही हकीकत जिसे जान कर, तुमने दे दी अपनी जान। दिए प्रलोभन थे यवनों ने, सांसारिक सुख संपत्ति के। किन्तु डिगे नही धर्म मार्ग से, करते हम तेरा गुण गान। तुम बालक थे नहि दुनिया को, कुछ भी तुमने देखा था। मात किया पर ज्ञानी जनों को, पा आत्मा का सच्चा ज्ञान। “लो काटो अपनी असिधारा, से तुम मेरी नश्वर देह। पर न हकीक़त काट सको तुम” इन शब्दों में कैसी शान। धर्म वेदी पर बलि दे करके, तुम न मरे पर अमर हुए। कितनी ही सदिया बीती पर, तुमको याद करे मतिमान।। वह वसंत उत्सव था जिसके, मद से मस्त हुई दुनिया। पर तुमने जीवन वसंत का, अंत किया रखने को आन। मात पिता गुरु बंधू सभी थे, तुम्हें डिगाने खड़े हुए। पर न डिगे तुम सत्य मार्ग से, क्यूँ न करे हम तेरा मान।। निर्भयता का पाठ पढ़ाया, तुमने डरती दुनिया को। दृढ़ता का धर्म अनुराग था, रखा था आदर्श महान। यही कामना तुमसे सारे, धर्म वीर जग में जनमें। त...

Hindu Dharamveer /भगत छनकू राम- हिन्दुत्व के लिए प्राण न्योछावर करने वाली महान आत्मा

भगत छनकू राम- हिन्दुत्व के लिए प्राण न्योछावर करने वाली महान आत्मा यह घटना उनीसवीं सदी के शुरुआत में बहावलपुर (आज के पाकिस्तान में) की मुसलमानी रियासत की है. छनकू नाम का एक दुकानदार इस रियासत में था जो राम का भक्त था. एक बार कुछ जिहादियों ने इसकी दुकान से कुछ सामान माँगा और इसके तौलने पर तौल कम बताकर इसे राम की गाली दी. इस रामभक्त ने सहन न होने पर पैगम्बर ए इस्लाम पर कुछ कह दिया. जिहादियों ने क़ाज़ी (इस्लामी न्यायाधीश) तक बात पहुंचा दी जिस पर क़ाज़ी का फतवा आया कि या तो इस्लाम क़ुबूल करे या मौत. इसने जवाब में कहा कि राम के भक्त रसूल के भक्त नहीं बन सकते! बस इस पर इसे संगसार (आधा जमीन में गाढ़ कर आधे पर चारों तरफ से पत्थर मार मार कर मार डालना) करने की सजा हुई और चारों ओर से पत्थर बरसा कर इसे कुचल दिया गया. धर्म पर यह बलिदान क्या किसी से कम है . आज के सब हिन्दुस्तानीयों को फख्र करना चाहिए कि उनके पूर्वजों ने किस तरह अपने धर्म की रक्षा की. [यह कविता १९२० के दशक (दहाई) में बहुत से उर्दू अखबारों में छपी. इसको हिंदी लिपि में बदलने का श्रेय प्रसिद्ध इतिहासकार श्री राजेन्द्र जिज्ञासु को है.] कहूँ ...