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मोदी भारत के युथ आइकॉन बन कर उभरे हैं

मोदी भारत के लिए ख़तरा हैं , बिहार को तहस -नहस कर देगा मोदी। आरएसएस देश पर नियंत्रण करना चाहती है , सेकुलरिज्म खतरे में है आदि आदि।   जैसे ही देश के किसी भी हिस्से में चुनाब होने होते हैं तो  मोदी और बीजेपी विरोधी लोग ऐसी ही ब्यानवाज़ी शुरू कर देते हैं। लेकिन इसबार आयरलैंड के दौरे पे गए मोदी की बॉडिलैंगुएज बता रही है के बिहार जीता जा चुका। संस्कृत मन्त्र उच्चारण से कार्यक्रम का आरम्भ हुआ और मोदी -मोदी के नारों से  सभा स्थल गूंजा भी।  आयरलैंड में मोदी ने ऐलान किया "भारत के लोगों को अब सर नहीं झुकाना पडेगा , भारत के युवा अब बोझ नहीं ताक़त  बनगए हैं देश की, अब हम दुनिया को कह सकते हैं 21 वीं सदी हमारे नाम होगी"।  ऐसा कभी सोचा भी नहीं होगा कांग्रेस और बाकी बिरोधियों ने कि "भारत के भी अच्छे दिन आ सकते हैं"।  उधर मोदी बिरोधियों के लिए बर्नोल हाथ में लेकर सुनने वाली खबर है 'हिन्दुस्तान टाइम्स के सर्वे के अनुसार " मोदी भारत के युथ आइकॉन बन कर उभरे हैं , 50 % से अधिक लोगों ने मोदी को तरक्की का पर्याये माना है"।   आयरलैंड  क...

Fadnavis-Slaps-Rajdeep- Replied to the open-letter -Why Meat Ban

Dear Rajdeep, Normally I don’t reply to every open letter by ‘senior’ journalists but this time I thought if I didn’t, the Goebbels law — speak what is untrue several times over and it becomes the truth — may prevail. Your letter is an excellent example of how a section of the media, without having sound knowledge, bashes a government with an agenda. Let me bring some clarity to the first issue you have raised. My state government did not take the decision to ban meat. Not a single new order went from the government to any local body. The Congress government in 2004 took the decision to close a slaughter-house for two days in Paryushan Parva. It was conveyed to all municipal corporations then. Since then all municipal corporations including Mira-Bhaindar started implementing it. Additionally municipal corporations like Mumbai and Mira-Bhaindar adopted resolutions to ban it for additional days within their own powers, which in the case of Mumbai dates back to 1994. Surprisingly,...

कब तक ज़ाकिर नाइक जैसे लोग देश को बांटने में कामयाब होते रहेंगे।

कल किसी मुस्लिम जानकार ने डॉ ज़ाकिर नाइक के ज्ञान के बखान से परिपूर्ण लेख फेसबुक पे शेयर किया , जिसमे लिखा था के वेदों में गौ -मांस खाने का समर्थन किया गया है।  एक दम से गुस्से की लहर सी दौड़ गयी , क्रोध तो आप जानते हैं दिमाग  का दही कर देता है। खैर ,ऐसे -तैसे करके शान्ति प्राप्त हुई तो दिमाग की बत्ती भी जल उठी। अब देखो ना एक  पढ़े लिखे मुस्लिम होने के नाते डॉ नाइक ने हिन्दू ग्रन्थ, यहाँ तक की वेदों   का अध्ययन भी कर लिया ,  मै बताना चाहूंगा वेदों में संस्कृत भाषा का प्रयोग हुआ है और संस्कृत भाषा में कुल शब्दों की संख्या ढाई अरब से अधिक है संस्कृत में एक ही शब्द के कई अर्थ निकलते हैं। लेकिन ज़ाकिर नाइक ने मेहनत करी और हिन्दू ग्रंथों से वो ऋचाएं ढूंढ निकालीं जिनमे जीव ह्त्या और गौ-हत्या को ज़रूरी तथा महान बताया गया है।  मै हैरान नहीं हुआ , लेकिन दुखी ज़रूर हुआ था। गुस्से  में अंग्रेजी में कुछ कठोर शब्द   भी फेसबुक पे चेप दिए। एक विद्वान जीव ह्त्या के समर्थन के लिए दूसरे धर्मो के ग्रंथो से ऋचाएं ढूंढ कर सेक्युलर समाज को बता रहा ...

नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस और खानदानी बहादुर कांग्रेस कार्यकर्ता

 किसी संगठन या राजनितिक दल के सम्पूर्ण काडर को  अगर बहादुरी का मेडल देने की बात चले तो मेरी पसंद कॉंग्रेसी होंगे। इस संगठन की नींव 1885 में भारतियों को राजनीतिक नेतृत्व दिलवाने की सोच से किया गया था।  संगठन के लिए देश और देश की जनता सर्वोपरि थी , महात्मा गांधी , सुभाष चन्द्र बॉस , सरदार बलभभाई पटेल , लाल बहादुर शास्त्री आदि  लिस्ट बहुत बड़ी है लगभग सभी महान बिभूतियाँ जो आज़ादी की जंग में शामिल  थे ,कांग्रेस से भी जुड़े थे। अच्छा आज़ादी मिलते ही महात्मा गांधी ने मांग कर दी के कांग्रेस को भंग करदो क्योंकि देश आज़ाद हो चुका है और अब कॉंग्रस्स की ज़रूरत नहीं है। खैर , ये मांग नहीं मानी गयी और वक़्त के करवट लेते ही नयी कांग्रेस देश के सामने आ गयी , इस कांग्रेस में देश के लिए कोई जगह नहीं है और ना ही देश सेवा के लिए , एक और बात यहाँ नागरिक भी "भारतीय" ना होकर जाति -धर्म से पहचाने जाने लगे।  देश के सभी महान सेवक कहीं गुम हो गए और सिर्फ एक ही  परिवार देश का खैरख्वा हो गया , जी हाँ राहुल गांधी उसी परिवार की खेती हैं। वक़्त का फेर देखिये अब कोंग्रेसियों को ...

मोदी सरकार के लिए बदलाब कठिन है नामुमकिन नहीं

पर्यावरण के विषय में   काफी बातें और योजनाएं तैयार हो रही हैं।  सुनने में आ रहा है केंद्र सरकार अब जंगलों की देख रेख प्राइवेट कंपनियों या संस्थाओं के हाथ देने वाली है ,ऐसी सुगबुगाहट सुनने को मिल रही है। देखा जाए तो सरकार के पास बिकल्प हैं भी नहीं।  वन विभाग जो वनों को बचाने की सोच के साथ बनाया गया था , वनों को काटने या यूँ कहें लूटने का सबसे बड़ा विभाग बन गया है।  हम देश के किसी भी हिस्से में चले जाएँ आज लोग अपने निजी फायदे को ही सर्वोपरि रख रहे हैं , यही हाल सरकारी अधिकारियों का भी है तो उनको भी गलत नहीं कहा जा सकता क्योंकि समाज का प्रभाव ही तो उन पर पड़ा है। कल ही एक सेवा निवृत मुख्याध्यापक जी से बात हो रही थी उन्होंने बताया के शिमला हाई कोर्ट में किसी केस के सिल सिले में गया हुआ था तो वकीलों के साथ बात चल पड़ी , शाम का समय  था महफ़िल में नशे का सुरूर चढ़ने लगा था , एक वकील साहेब मेरे मुरीद हो गए और नज़दीक आकर बोले "हेडमास्टर साहेब आप केस जीत सकते हैं , आजकल जो जज हाई कोर्ट में है उसे लड़कियों का शौक है इधर उसके पास लड़की पहुंची उधर आप केस जीत गए।  एक...

मोदी समर्थक - सरकार की नीतियां जनता तक पहुंचाएं

आसपास की हलचल  भी कभी फायदा दे जाती है लेकिन सबसे ज्यादा सकूँ सिर्फ काम करने में मिलता है ,परिणाम  क्या होंगे इस बात से बेखबर छोटे बच्चों को एकाग्रता से मामूली से दिखने वाले क्रिया कलापों को करते देखो तो बड़े होने का अहंकार खत्म हो जाता है। जीवन में जो भी इंसान सफल  होता है उसमे बचपन कूटकूट के भरा होता है। बचपन भी एक सोच ही तो है ,जो अपने आप को समझदार और बड़ा समझता है वो कभी भी असंभव को संभव नहीं कर सकता।  दिल का बच्चा होना ज़रूरी है ,आज नरेंदर दामोदरदास मोदी का जनम दिन है और खुशकिस्मती से ए पी जे अब्दुलकलाम के बाद अगर कोई बचपने से भरा हुआ नेता देखा है तो वो मोदी है।  मोदी का उत्साह बताता है के उनका दिल अभी भी बच्चा है। उस देश में जहाँ लोकल ट्रैन समय पर नहीं चलती वहां के लोगों को बुलेट ट्रैन के सपने दिखाना और फिर उस सपने को शिदत साकार करने की जीतोड़ कोशिश समझदार कहलाने वाला नहीं कर सकता। अमेरिका जैसे हथियारों के व्यापारी देशों को सामने से चुनौती देने का काम भी मोदी ही कर सके , चीन को बॉर्डर पर ललकारने का दम भी मोदी सरकार ने ही दिखाया है।  यूँ ...

बीजेपी के नेता इस तरफ भी ध्यान दें

अच्छा, सबसे अधिक मज़ा आजकल टीवी पर कांग्रेस नेताओं को सुनने में आता है , आज  डाक टिकटों पर गांधी परिवार के  एकाधिकार को मोदी सरकार की चुनौती पे चर्चा सुन कर महसूस हुआ के जो भी मैनेजमेंट की किताबों में लिखा गया है , कांग्रेसी  बिना पढ़े हाईकमान की चम्पी करके ही वो ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। रशीद अल्वी जैसे कई नेता इस बात को सार्थक करते हैं। जो भी हो मोदी सरकार की नेहरू-गांधी के इलावा जो देश के नेता और स्वतंत्रता सैनानी हुए हैं उनको सम्मान देने की इच्छा ने 'अच्छे दिनों के संकेत दे दिए हैं ' . लालू यादव और नितीश कुमार का ढगबंधन बिहार की जनता को रास नहीं आ रहा है ये रुझान मिल रहा है।  लालू के टाइम में बिहार में सड़कें नहीं बनी , लालू कहते थे 'अगर सड़क बनेगी तो पुलिस आपके घरों तक जल्दी पहुँच जायेगी ,अगर बिजली जलेगी तो पुलिस रात को दूर से आपका घर देख लेगी तो आप शराब कैसे बनाओगे इस लिए ना सड़क और ना बिजली की ज़रूरत है। ' पता नहीं बिहार की जनता उन दिनों को भूल गयी है या याद हैं। नितीश के विरुद्ध लालू एक नारा दिया करते थे "ऐसा कोई सगा नहीं ,जिसे नितीश ने ठगा नहीं " ले...