Skip to main content

Posts

क्या आप उसके सहायक बनेंगे ?

देवा पाना दे ,देवा पेचकस देना ,आइल साफ़ कर देवा, ,देवा, देवा..........  नहीं ये सन्नी दयोल की किसी फिल्म का डायलॉग नहीं है बल्कि एक गरीव परिवार के एकमात्र सहारे की घटित कहानी है। दुनिया में दो तरह की सरकारें हैं एक सरकार लोगों पर शासन करती है दूसरी लोगों के दिलों पर। जनता पर राज करने वाली सरकार खुद डरी हुई होती है और जनता को भी डराया ही करती है। लेकिन दिलों पर राज करने वाली इलाही सरकार खुद भी निर्भय और जनता को भी निर्भय बनाती है। जनता पर शासन करने वाले पहले चढ़ा देते हैं फिर कहते हैं कूद जा संभाल लेंगे और खुद हट जाती है परिणाम, धड़ाम की आवाज से गिरा देते हैं। यही खेल चलता रहा है ,परन्तु ऊपर वाली सरकार(इलाही /भगवान् ) का सहारा जिसने भी लिया उसे सभी सेवा और सहारा देने की कोशिश करते हैं। जिसका प्रतीक दिवस गुरु पूनम के रूप में मनाया जाता है। अब आते हैं देवा कि कहानी पर ,बूढी मां तथा पोलियो ग्रस्त भाई की ज़िम्मेदारी को अपने कंधों पर लेने के लिए 10 वीं कक्षा पास करके ज़िन्दगी के मैदान में उतरा ही था कि जीवन ने एक और करवट ली देवा मानसिक रूप से बीमार हो गया। छत्तीसगढ़ के बिलासपु...

Edward Morgan Forster (1879-1970) 1 January birthday Special

Edward Morgan Forster (1879-1970) Great British literary critic and novelist E.M.Foster ( Edward Morgan Forster)    on 1st January 1879 in London  in a rich family . His Father was an architect  who died young but left enough money for his family to live happy life .Every writer has his own touch in writing so was Foster . His all works have direct or indirect relation with society . His greatest novel 'A Passage to India' is a master piece which gradually   became the basic text related to post-colonial era .Here in the novel Foster has advocated  'the equality' among the people of this world. Last words of one of the protagonists Dr Aziz expressed his earnest desire for independent nation so that he can be equal to Fielding . Foster was active member of literary ‘Bloomsbury set and a critic . According to Virginia Woolf  ‘he says the simple things that clever people don't say; I find him the best o...

बवासीर या पाइल्स या Hemorrhoid / मूलव्याधि

बवासीर या  पाइल्स  या Hemorrhoid /   मूलव्याधि आदि नामों से जानी जाने वाली दर्दनाक और खतरनाक बिमारी अघिकतर हमारे गलत रहन -सहन ,गलत खान-पान और गलत व्यवहार के कारण होती है,हो सकता है कि ये आपको अटपटा लगे लेकिन सच यही है।  अगर किसी भी मनुष्य को ठीक से रहना , बैठना और कहना आ गया तो ये बिमारी कभी भी आपके शरीर को अपना शिकार नहीं बना सकती क्योंकि   इस  बिमारी   की जड आपका खराब पेट ही माना जाता है , चाहे कब्ज हो  या फिर बार -बार शौच जाने की आदत बवासीर या पाइल्स के सबसे बडे कारक यही माने जाते हैं।   बढ़ती उम्र से भी इसका कारण हो  सकती है।  कई लोगों को शौक होता है शौचालय  में इंग्लिश सीट के ऊपर बैठ कर अखवार या  मैगज़ीन पढने का ,तो कई लोग  मोबाइल लेकर शोचालय में काफी समय विताते हैं ऐसे लोगों  को भी बवासीर अपना शिकार बनाती है। शौच के बाद अगर ठीक ढंग से गुदा की सफाई ना हो तो बवासीर हो सकती है।   गर्भवती महिलाओं को भी ये बिमारी घेर सकती हैं लेकिन  ड...

Who Is Responsible ? / दोषी कौन ?

बच्चों का भविष्य सुरक्षित  करने की चाह में अधिकतर माता-पिता आजकल बच्चों का वर्तमान खराब कर रहे हैं।  बच्चों को स्थानीय भाषा में बात नहीं करने दी जाती क्योंकि देसी भाषा बोलने वाले को गंवार या अनपढ़ समझने लगता है समाज।  अधिकतर माता-पिता अंग्रेजी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भाषा मान कर या फिर घर में हिंदी बोल कर बच्चों को महान होने के तगमे पकड़ा रहे हैं। परिणाम स्वरुप भारत में सैकड़ों वर्षों से बोली जाने  वाली देसी भाषाएँ या बोलियां अब बिलुप्तता की और अग्रसर हो गयी हैं।  मैं हैरान हूँ ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश हैं जो अपने यहाँ बाहरी जानबरों को आने नहीं देते या कहें कि वैन है बाहरी जीव आप उस देश में ले कर नहीं जा सकते  परन्तु भारत की देसी नस्ल की गौ को वहां की सरकार बाहें खोल कर अपना रही है क्योंकि देसी गौ के गोबर -मूत्र और दूध में जो गुण हैं वो किसी और जीव से नहीं  मिलते लेकिन अपने यहाँ भारत में देसी नस्ल को तिरस्कार की दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि भारत का समाज इन्फेरियरिटी काम्प्लेक्स से ग्रस्त है।  भारत के लोगों को लगता है जो कुछ भी उनके पुरखो...

लिखो क्योंकि अपने को खोजना है / Why To Write ?

Love Is The Only Medicine For This World आपके विचार कोइ पढ़े  मत लिखो  , न ही प्रसिद्धि के  लिए।  किसी तरह की कोई सनसनी  के लिए भी नहीं और ना ही गुप्त अजेंडे  के लिए ,ना पैसा  और ना ही पुरस्कार की लालसा दिमाग में रखो तथा किसी भाषा के अध्यापक को खुश करने   लिए , इस लिए भी मत लिखो की किसी ने कहा है लिखने के लिए।  लिखो सिर्फ इस लिए कि आपको लिखना है अपने भाव और बिचारों को शब्द देने हैं लिखना है जिंदगी  के प्रति अपने नजरिये को शव्द देने के लिए के लिए।  और गलतियों कि चिंता ना करो सभी गलतियां करते हैं। लिखो क्योंकि अपने को खोजना है 

Gujarat Election - One Sided Battle

Love Is The Only Medicine For This World हमारे लिए शब्दों का महत्व आजकल बहुत अधिक होता है अगर वे नकारात्मक हैं , अगर शव्द सकारात्मक हैं तो अधिकतर लोग उनकी तरफ ध्यान भी नहीं देते।  यही हालात हमारे जीवन में भी हैं जो भी कुछ अच्छा है वो दिखता ही नहीं है लेकिन नकारात्मकता की मोटी चादर हमारे मन और चित को पूर्ण रूपेण ढके रहती है।  गुजरात चुनाव में भी यही हो रहा है , समाज को जाति के नाम पर बांटा गया और फिर धर्म के नाम की राजनीति मुख्य मुद्दा हो गयी।  गुजरात में विकास मुख्य मुद्दा पिछले चुनावों में था लेकिन इस बार पटेल आरक्षण मुहीम को इतना अधिक प्रचार मिला की चुनाव के मुद्दे सिमट कर जाति और धर्म तक ही सीमित हो गए।  दोष नेताओं को नहीं दे सकते समाज को जनता को जैसा चाहिए वही मुद्दा मुख्य हो जाता है। गुजरात के चनावों को काफी महत्व पूर्ण मन जा रहा है क्योंकि मोदी का राज्य है और इसके विकास मॉडल के  नाम पे ही मोदी सत्ता में आये थे।  कान्ग्रेस् ने आरक्षण तथा और कई बातों को जाति से जोड़ कर चुनावों से पहले ही विकास को पागल करार दे कर गुजरात को पिछड़ा राज्य घोषित कर दिया...

Smog - The Killer Dust /स्टोन क्रेशरों की जानलेवा धूल हवा में

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है और जीना दूभर हो गया है दिल्ली वालों का लेकिन हैरानगी होती है जब वैज्ञानिक भी नेताओं की तरह बातें करने लगते हैं।  हमारे देश में खनन माफिया का कहर इतना अधिक है कि वैज्ञानिक भी जनता को बढ़ते प्रदूषण का पूरा सच बताने से डरते हैं। क्या कोर्ट क्या डॉक्टर सभी कहते हैं कि हवा में महीन धूलकण बहुत जेहरीले हैं और दिल्ली वालो के सांस उखाड़ने वाले ये धूलकण किसानो द्वारा जलाई जा रही प्रालि के कारण फ़ैल रहे हैं।  कोई पूछने वाला नहीं इनसे की जब आग से प्रालि जलाई जाती है है तब की किसान रेट-मिटटी मिलाकर हवा में मिला देते हैं या लोई और कारण है जिस के बारे में बोलने से सभी डरते हैं।  मतलब ये माफिया इतना बड़ा और ताकत वॉर है कि कोई भी जानकार इस के बारे में बात ही नहीं करता।  जी हाँ , खनन माफिया की ही बात कर रहा हूँ। स्टोन क्रेशरों द्वारा हवा में महीन जानलेवा धूल मिलाई जा रही है दिल्ली की धूल तो मीडिया दिखा रहा है लेकिन अधूरे सच के साथ।  भारत में इस समय वायु प्रदुषण के सबसे बड़े कारणों में स्टोन क्रेशर आते हैं परन्तु ये माफिया इतना ताकतवर है की कोई भी पर्यवरण ...