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दुर्गुण मनुष्य को आत्मघाती हमलावर बना देते हैं

भगवान् ने जन्म और मरण का अधिकार अपने पास रखा है। अपने ढंग से सबके जीवन की शुरुआत तथा अंत करवाता है। ना तो हम जन्म चुन सकते हैं और ना ही मृत्यु ही अपने ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। हम सिर्फ बीच के समय {जन्म और मृत्यु }पर अधिकार जता सकते हैं। जो लोग दूसरों के जीवन पर अकारण हस्तक्षेप या आक्रमण करते हैं फिर चाहे उग्रवादियों हों या कट्टरवादी उनको ये याद रखना चाहिए कि भगवान् को उनकी हरकते अच्छी नहीं लगाती।  आजकल आत्मघाती आतंकियों का ज़माना है। पूरी दुनिया को इन आतंकियों ने भयभीत किया हुआ है क्योंकि आतंकि लोग सही मायने में मानव जीवन का महत्व नहीं समझते।  उनका मस्तिष्क गलत विच्चारों से भर कर इतना  भयंकर बना दी जाती है कि वे अपने साथ कईयों को मार कर ही  रसंतुष्ट  होते हैं। बुरे विचारों का असर कितना भयानक होता है बस ऐसा समझें कि जीवन में दुर्गुणों का प्रवेश होते ही इंसान आत्मघाती हमलावर बनने की तैयारी शुरू कर देता है। इंसान के भीतर ही आत्मघाती हमलावर दुर्गुणों के सहारे से पता नहीं कितनी अदृश्य हत्याएं करता है। काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह तथा अह...

लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता रहे -जीना इसी का नाम है

इंसान और जानवर सभी जीवो के बीच एक अदृश्य सेतु बना हुआ होता है इसका निर्माण तभी होता है जब दो लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता हो। ये फर्क नहीं पड़ता दोनों लोग किस परिवार ,जाति ,धर्म या प्रजाति के हैं।  इंसान भी हो सकते हैं जानवर भी। पुरानी फिल्म अनाड़ी का गाना जिसके लेखक शैलेन्द्र थे इन भावो को पुरणत्या व्यक्त करता है-किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार ,किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार जीना इसी का नाम है। इतने प्यारे भाव हों और घर में कलह या अशांति हो तो कमी विचारों की नहीं बल्कि कमी बिकल्पों की है। पुराने समय में घरों के फैसले परिवारों के बड़े बज़ुर्ग ही लेते थे ,उनके आगे कोई ना -नुकर नहीं  चलती थी किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी। वक़्त बदला और परिवारों में कई शक्ति केंद्र हो गए। ऐसे विकट समय में अगर किसी से कोई फैसला देने के लिए कहे तो उनको अपना विचार बताते समय ऐसा कहना चाहिए कि मेरे विचार में तो ये काम ऐसे करलो बाकी और भी कई तरीके हैं जो ठीक समझो वही करो। जैसे ही आप विकल्प सामने रखते हैं, फैसला सुनने वालों को आज़ादी मिलती है कुछ...

Tour De France 2017 /टूर डि फ्रांस

1 जुलाई से दुनिया की सबसे प्रसिद्ध साइकिल रेस 'टूर डि फ्रांस ' फ्रांस में आयोजित हो रही है ,तीन सप्ताह चलने वाली ये साइकिल रेस 3500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी को समेटे हुए है। ये दूरी 21 भागों या चरणों में बांटी गयी है। हर दिन एक चरण पूरा करना होता है। कुल मिला कर बहुत ही कठिन और थका देने वाली ये रेस ऊँचे पहाड़ों से होकर गुज़रती है। इस रेस में उतार -चढ़ाव कितने जानलेवा होते हैं उसका एक उदाहरण है ब्रिटेन के सबसे सफल पेशेवर साइकिलिस्ट टॉमी सिम्पसन की मृत्यु हो गयी थी वर्ष 1967 में। उनकी उम्र उस समय 29 वर्ष थी और उन्होंने 12वा सत्र पूरा कर लिया था और 13 वें सत्र की तयारी कर रहे थे तभी मो वांटू पर्वत श्रृंखला पे टॉमी की मृत्यु हो गयी। वे जिस जगह गिरे थे अब वहां एक स्मारक बनाया गया है। हर बार टूर डि फ्रांस के प्रतियोगी इस स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा अपने प्रिय साइकिलिस्ट के लिए गिफ्ट चढ़ाते हैं जिनमे प्रमुख रूप से पानी की बोतले ,हेलमेट आदि होते हैं। ये प्रतियोगिता 1903 में पहली बार आयोजित हुई थी।  इसका पहला आयोजन एक अखबार की बिक्री बढ़ाने के लिए अर्थात विज्ञापन के तोर प...

संवेदनशील नेता और सरकार - शुभ संकेत है देश की जनता के लिए !

बात पिछले वर्ष बरसात की है जगह महाराष्ट्र का मुंबई -पुणे एक्सप्रेसवे था।  बारिश से डर कर जहाँ अधिकतर लोग घरों में दुबक जाते हैं , कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो उस सुहाने मौसम को महसूस करने निकल पड़ते हैं।  ऐसी ही ठेठ मुम्बईकर महिला उषा प्रताप अकेले अपनी कार  में सवार होकर घाट की सुंदरता को निहारने निकल पड़ीं।  धीरे -धीरे चलती गाडी को एकाएक पीछे से आती हुई तेज रफ़्तार राज्य परिवहन की बस ने ओवरटेक कियापरिणाम स्वरुप सड़क पे इकठ्ठा पानी कार के अंदर भी घुस गया। उषा प्रताप को ये कोई कष्ट देने वाली अनुभूति नहीं थी , बारिश में अक्सर ऐसा हो जाता है और अगर पानी से इतनी नफरत होती तो घर से ही ना निकलती।  लेकिन जो बात महिला को चिंतित कर गयी वो थी बस की चाल।  बस तेज गति से हिचकोले खाते जा रही थी और ज़रा सी चूक बस के यात्रियों को मौत की आगोश में भेज सकती थी।  खुशनुमा मौसम बोझिल हो गया और महिला गाडी में बैठे -बैठे यात्रियों की कुशलता की प्रार्थना करने लगी।  फिर ना जाने क्या सोचा और अपनी कार की स्पीड बढाकर बस के नंबर नोट कर लिया और अपनी कार सड़क किनारे पार्क करदी। ...

What is Metaphysical poetry as John Donne's Poetry is called? by Amit Vashist

Ans.  In order to understand John Donne ‘s poetry , first of all we have to  understand the basics of his poetry , the nature of his poetry.  As per literary world “Donne’s poetry is of metaphysical nature”.  This word is very important to understand  because by understanding this one word ‘Metaphysical” we will be able to understand John’s poetry without confusion. So What is “metaphysical”? Metaphysics- In modern philosophical terminology, metaphysics refers to the studies of what cannot be reached through objective studies of material reality. Metaphysical – This word has been in use from very long time . In history , philosophy begins with the Pre-Socratics is considered as Metaphysical Philosophy . It is because Plotinus  the philosopher  has said at that time that human mind is only reflection of a more universal and perfect reality , which he named as ”GOD” the ordering power in the universe. Areas of ...

किराये की माँ -एक सस्ता सौदा !

मैं  एक दिन अपने छात्रों के साथ बात कर रहा था और साधारण बातचीत कैसे गंभीर होती चली गयी पता ही नहीं चला।  बातचीत की शुरुआत बच्चों को देख कर या उनसे सीख कर हम बड़े लोग कैसे सुखी रह सकते हैं इस मुद्दे पर हुई।  सारा माहौल बोझिल हो गया , दुःख से भर गया जब एक छात्रा (रीना) ने अपने पड़ोस में रह रही एक वर्ष की बच्ची की दास्तान सुनाई।   लगभग 5 महीने पहले अर्थात जब छुटकी सिर्फ 7 महीने की थी तब उसकी माता और पिता उसे दादा -दादी के पास छोड़ कर न्यूज़ीलैंड चले गए हैं।  7 महीने की बच्ची सभी को ढूँटति थी, अपनी माँ को सबसे अधिक। नम आँखों और उदास चेहरे से कुछ दिन निरीह गुड़िया हर तरफ टकटकी लगा कर देखती रहती , फिर एक दिन रीना ( मेरी छात्रा जिसने ये घटना सुनायी) उनके घर गयी किसी काम से , रीना ने गुड़िया को जैसे ही गोदी में उठाया, उस नन्ही परी ने जोर से किलकारी मारकर 'माँ ' कहा और उसके सीने से लिपट गयी। किसी भी ज़िंदा इंसान के लिए दुधमुँहे बच्चे का ऐसा निःस्वार्थ प्रेम आनंदित करने वाला होता है लेकिन आज रीना बहुत ही दुखी और उदास हो गयी उस नन्ही राज कुमा...

खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों पे हिमाचल प्रदेश अकैडमी है मेहरवान !