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जविक खेती/ ZEE NEWS/Rajeev Dixit

गोबर का खाद डालने से उत्पादन ज्यादा होता यूरिया DAP की तुलना मे ! जविक खेती पर जी न्यूज़ की रिपोर्ट देखने के लिए क्लिक करें  https://www.youtube.com/watch?v=bBOww ZJgU6g राजीव भाई ने 12 साल कर्नाटक ,महाराष्ट्र मे हजारो किसानो के साथ काम किया और उन किसानो ने राजीव भाई के कहने पर यूरिया DAP छोड़ कर गोबर का खाद डालना शुरू किया ! और जिन किसानो के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 20 से 25 मीट्रिक टन गन्ना होता था आज उस किसान के खेत मे एक एकड़ मे 90 से 100 टन गन्ना होता है ! जिन किसानो के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 12 क्विंटल गेहूं होता था आज उस किसान के खेत मे गोबर की खाद डालने से एक एकड़ मे 20 से 22 क्विंटल तक गेहूं होता है ! गोबर की खाद बहुत तरह के जीव जन्तुओ का भोजन है और यूरिया भोजन नहीं जहर है आपके खेत मे एक जीव होता है जिसे केंचुआ कहते हैं केंचुआ को कभी पकड़ना और उसके ऊपर थोड़ा यूरिया डाल देना आप देखोगे केंचुआ तरफना शुरू हो जाएगा और तुरंत मर जाएगा ! जब हम टनों टन यूरिया खेत मे डालते है करोड़ो केंचुए मार डाले हमने यूरिया डाल डाल के !! केंचुए मिट्टी को नरम बनाते है पोला ब...

Kindness is Quality of India/ रामदेव दुश्मनो की चालों से अनभिज्ञ नहीं हैं

पिछले दिनों में एक विचार ने मुझे काफी विचलित किया और परिणाम स्वरूप मैंने अपने लेखन में बदलाब करने का निर्णंये लिया।  सकारात्मकता को अब मैंने अपने लेखन की सर्वश्रेष्ठ पूँजी बनाने की शुरुआत की है। राजनितिक विचार और कटाक्ष भी होंगे लेकिन मूलतत्व "सकारात्मकता " अब मुख्य ध्ये होगा।  क्योंकि अपने लोगों तथा समाज की अगर तारीफ हम नहीं करेंगे ,अच्छे कामो की अगर रौशनी हमारे समाज में फैलानी है तो नकारात्मकता को छोड़ना होगा।  ओबैसी क्या कहता है क्या फरक पड़ता है , JNU में कुछ एक मूर्ख लोग देश तोड़ने की बात करें तो उनको महत्व क्यों दें ? बल्कि देश में हो रहे अच्छे काम तथा करने वालों के बारे में बात करेंगे तो कुछ सीखने को मिलता रहेगा।  शव्दों का असर बहुत  है ,ऐसे ही कर्मो का भी। हमारे देश में नकारात्मकता जानकर या अनजाने में फैलाई गयी है क्या फरक पड़ता है , मूलतत्व है  आज़ादी के बाद से हमारे हीरो और पहचान तथा इतिहास सभी पर परोक्ष रूप से प्रशन चिन्ह लगा दिए गए , पढ़ाई में इतना बदलाब हुआ के लोग भारतीयता का सही रूप ही भूल गए। एक युवा ने प्रशन किया "भारत हमारी माता कैसे हो सकता ह...

Do Your Duty Life Is Beauty/ये लोग काम करने का मज़ा लेते हैं

मैरियस केडियास्कि पोलैंड में इस समय बहुत प्रसिद्ध पेंटर हैं उम्र 23 साल , लेकिन जो चीज़ इनको खास बनाती है वो है इनकी ज़िद्द। ये शख्स बिना हाथों के ही पेंटर बना है ,इसका कहना है काम करने के लिए हाथ नहीं नियत चाहिए। ऐसे कई उदाहरण हमारे आसपास भी होते हैं।   मै रोज़ बस द्वारा सफर करता हूँ , रास्ते में रोजाना 2 वृद्ध औरतों को रोज़ काम करते हुए देखता हूँ।  नहीं दोनों ही महिलायें एक दूसरे को नहीं जानती , लेकिन दोनों में समानता है काम करने का जज़्वा।  दोनों की उम्र 80 से ऊपर है लेकिन बिना छुटटी ये दोनों औरतें घास काटते हुए मुझे हर रोज़ दिखती है बारिश हो तो हाथ में छाता लिए इंतज़ार करते हुए देखा जा सकता इनको कि कब बारिश रुके और ये अपना काम करें।  आज के समय में जब जवान लड़के -लड़कियां शरीर से काम लेने में डरते हैं ये दो बज़ुर्ग महान उदाहरण हैं।   खैर ,देश के प्रधान मंत्री भी कर्मयोग का उत्कृष्ट उदाहरण हैं ,जब से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं कोई छुट्टी नहीं की।  सभी काम तेज़ गती से करते हैं लेकिन अपने आप में मस्त रहते है।  कमाल के लोग होते हैं ऐसे लोग , ...

Make History/बिना थके बढ़ने वाले ही इतिहास लिखते हैं

  एक दिन एक संत से उनके शिष्य ने पुछा "गुरुदेव आप जिस समाज की सेवा करने के लिए हमे भेजते हैं उसी समाज के लोग हमारा बिरोध करते हैं ,कई बार तो हमारे पीछे कुत्ते छोड़ देते हैं"। गुरु देव खूब हँसे और जबाब देते हुए बोले " बेटा सुआर को अगर तुम गन्दी नाली में से निकाल कर साफ़ पानी से धोओगे ,साबुन से नहलाओगे और बिलकुल साफ़ जगह रखोगे तो तुम्हें क्या लगता है सूअर को अच्छा लगेगा ? बेटा  हमे समाज की सेवा इस लिए करनी है क्योंकि हमे लगता है समाज को सेवा की ज़रूरत है ठीक वैसे ही जैसे की सूअर को साफ़ करने का निर्णय हमारा अपना था ,सूअर को तो गन्दगी में बैठने का स्वभाव बन गया है। नेहला कर जैसे ही सूअर को छोड़ो वो सीधे नाली में -कीचड में जा कर लौटने लगेगा।  इस वार्तालाप में आपको सीखने के लिए एक ही चीज़ है और वह है लगातार संघर्ष अच्छाई के लिए।  जिस भी जगह आप काम कर रहे हैं आपको खूब मेहनत करनी पड़ेगी अगर आप अच्छा और ईमानदारी से काम करना चाहते है तो।  असंभव नहीं है लेकिन आपको विश्वास होना चाहिए की आप सही रास्ते पर हैं। उदाहरण के लिए नरेंद्र मोदी को ही ले लो , मोदी सरकार ने अपने सभी बजट...

SECULAR AND COMMUNAL NEWS /जनता को गुमराह करना भारत में बहुत आसान है

अगर भारत की बर्तमान स्थिति देखि जाये तो एक बात समझ में आती है देश दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंट चूका है एक RSS  वाली दूसरी ISIS वाली। अब आप स्वयं देखें JNU  के विद्वान , कांग्रेस के सिपेसलार , मुस्लिम्स तथा ईसाई नेता अधिकतर लोग पाकिस्तान जिंदाबाद कहने में शर्म महसूस नहीं  करते हैं लेकिन भारत माता की जय कहने से अच्छा इनको मरना लगता है।स्थिति खतरनाक इस लिए महसूस होती है क्योंकि देश में नकारात्मकता को मुख्य ख़बरों में जगह मिलती है लेकिन सकारात्मक बदलाब और सकारात्मक ख़बरें कहीं छुपा दी  जाती हैं। पिछले दिनों गुजरात के एक व्यवसायी ने 200 करोड़ रूपये बेटिओं के लिए दान कर दिए , जिस घर में दूसरी बेटी जन्म लेगी उस परिवार को 2 लाख से अधिक रूपये मिलेंगे।  बिडम्बना देखिये ये दिलेरी या दरियादिली सुर्खी नहीं बन सकी लेकिन देशद्रोही का संसद मार्च प्राइम टाइम की खबर बना दी गयी।  दिल्ली में विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समारोह होता है 35 लाख लोग देश और विदेश से आकर  हिस्सा लेते हैं , भारत में दुनिया धन्यबादी होकर आयी , बिना ख़ुशी -सुख मिले कौन लाखों रुपए खर...

Karan Thapar Exposed / जेहादी मीडिया देश का दुश्मन बन गया है?

शब्दों का मोह पाश भी बड़ा अजीब है और अगर शब्द अंग्रेजी पत्रकार के हों तब तो शब्दों के प्रभाव में बजन अपने आप आ जाता है।  आज की पंजाब केसरी अखबार में एक लेख पढ़ा लेखक अंतर्राष्ट्रीय अंग्रेजी पत्रकार हैं नाम  'करण थापर ' . बहुत ही उत्कृष्ट पत्रकार रहे हैं ये , इनके शब्दों के चुनाब से बहुत से पाठक  इतने प्रभाभित होते हैं के इनके शव्दों को "भगवान के शब्द " माना जाता है। खैर , JNU प्रकरण ने बहुत कुछ साफ़ किया है।  आज़ादी के बाद से भारत की मीडिया पर एक विशेष विचारधारा का अधिपत्य रहा है , ये बात भी मुझे तथा आप सभी को JNU प्रकरण के बाद ही पता चली। जिन मीडिया वालों के प्रभाव और योग्यता के हम वर्षों  से कायल रहे, उनकी "गुप्त विचारधारा" का साक्षातकार हुआ।  कर्ण थापर भी उन छदम  ज़मात के निकले।   कन्हैया कुमार ने देश विरोधी नारे लगाये भी और लगवाए भी लेकिन करण थापर के शब्द कन्हैया के लिए जो प्रयुक्त हुए हैं ध्यान से पढियेगा - "वह छोटे से और गठीले कद का व्यक्ति है जो बिलकुल ही आपके लिए किसी प्रकार की चुनौती होने का आभास नहीं देता। उसके चेहर...

BT Cottan and Modi Sarkar's Sixer/मोनसेंटो की भारत छोड़ने की धमकी के सामने नहीं झुकी भारत सरकार

बहुराष्ट्रीय कम्पनी मोनसेंटो की भारत छोड़ने की धमकी के सामने नहीं झुकी भारत सरकार बीटी कॉटन को लेकर लंबे समय से जारी विवाद में केंद्र सरकार ने बड़ा और कड़ा फैसला लिया ।  केंद्र ने  बीटी कॉटन(कपास ) बीज के एक समान दाम तय कर दिए हैं। इसके अलावा घरेलू बीज कंपनियों की ओर से मोनसेंटो को दी जाने वाली रॉयल्टी में भी 70 फीसद तकटौती ।  सरकार के इस कदम का फायदा किसानों और घरेलू बीज कंपनियों को ।  इस फैसले से अमेरिकी दिग्गज बीज कंपनी मोनसेंटो को तगड़ा झटका लगा है। इस मामले में कंपनी भारत छोड़ने की भी धमकी दे चुकी है।  इसके फैसले के तहत सरकार ने बीटी कॉटन के 450 ग्राम के पैकेट की कीमत पूरे देश भर में 800 रुपये तय कर दी है। अगले महीने से शुरू हो रहे कपास वर्ष के लिए यह कीमत लागू होगी।  अब तक किसानों को एक पैकेज बीज पर  1,000 रुपये तक  चुकाने पड़ते थे। बीटी कॉटन पर रॉयल्टी में 70 फीसद तक की कमी की गई है। इसकी वजह से मोनसेंटों-महिको बायोटेक इंडिया (एमएमबीएल) को प्रति पैकेट सिर्फ 49 रुपये की रॉयल्टी मिलेगी। फिलहाल रॉयल्टी की यह राशि टै...