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And India Divided ! / बांटो और राज करो !

पिछले काफी समय से भारत में अलप संख्यक अपीजमेंट की राजनीति होती रही है । लेकिन हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद शांत रहे या बोला  जाए कि उदासीन रहे, उनको कभी भी एक सुर में किसी भी बात का विरोध करते नहीं देखा गया।  अभी भी ऐसा ही है हिन्दू एकता में कोई बिकास नहीं हुआ कुछ वर्ष पहले आमिर खान अभिनीत 'P.K " फिल्म में हिन्दू धर्म पर समूल रूप से कुठारा घात किया गया था ,मज़ाक उड़ाया गया था लेकिन कहीं भी हिन्दुओं में रोष उत्पन नहीं हुआ जबकि भगवान् भोले नाथ को हसीं का पात्र बनाया गया था।  फिल्म रिलीज़ ही नहीं हुई अपितु कीर्ति मानो के साथ कमायी करने वाली फिल्मो की लिस्ट में शामिल हो गयी।   उधर ताज़ा उदाहरण 'पद्मावती ' है जो राजपूत गरिमा के खिलाफ मानी जा रही है और चारों तरफ भारी बिरोध हो रहा है , वो बात अलग है कि फिल्म अभी रिलीज़ भी नहीं हुई है।  ऐसे कई उदाहरण हैं हमारे देश में जब हिन्दू धर्म से बढ़ कर जातियों ने देश और समाज को बाँट दिया।  सभी धर्मो में ,पूरी दुनिया में ऐसा ही तांडव है।  खैर बात भारत की करें तो पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा  हैं , अगर किसी...
युवा मन की उड़ान हिमालय से ऊंची हो सकती है और प्रशांत महासागर की गहराइयों से भी गहरी हो सकती वशर्ते युवा सेवा ,साधना और स्वाभिमान को जीवन में उतार चूका हो।  आजकल अधिकतर लोगों को कहते सुना जा सालता की 'इस सिस्टम का कुछ नहीं हो सकता ,सदियों से इंसान और समाज ऐसा ही रहा है कई लोगों ने कोशिश करि लेकिन समाज नहीं बदला।  हा हा  हा....... कितना भयंकर मज़ाक और नामसझी भरा नादान इंसान है , भाई जितने भी महान लोग हुए या समाज को सुधारने वाले हुए सभी ने अपने काम से , अपंने कर्म से ही शिक्षा दी है।  जिस भी इंसान की बात को समाज अनदेखा कर रहा है सच तो ये है की वो इंसान खुद अभी कच्चा है और कच्चे फल किसी को पसंद नहीं आते फिर ये तो बातें हैं।  जब तक आपके जीवन में ईमानदार कोशिश नहीं होगी आपको कोई नहीं सुनेगा।  अगर कोई अपवाद हो तो बात अलग है। आपको कर्म योग को जीवन में उतरना होगा , उसके परिणामस्वरूप आपके शब्दों में 'बज़न ' होगा और बजनयुक्त शब्द चाहे ए पी जे अब्दुलकलाम के हों या भगत सिंह के चाहे नरेंदर मोदी के हों या महात्मा गांधी के  सभी को एक जैसा सम्मान मिलेगा और प्रभाव भी हज़ा...

देश के युवा सार्थक प्रयास करने लगे है उन्हें प्रोत्साहन चाहिए मोदी जी / Youth Is Waiting - Modi ji

 पिछले वर्ष हनुमंतप्पा समेत मद्रास रजिमेंट के 10 सैनिक सियाचिन ग्लेशियर में अकस्मात हिमस्खलन का शिकार हो गए ,उनको ढूंढने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय लगा। बहुत दुःख की बेला थी लेकिन हमारे पास आधुनिक तकनीक ही उपलभ्ध नहीं थी। परम्परागत तरीके से खोजने में सबसे ज्यादा समय लगा हजारों टन बर्फ के नीचे दबे सैनिकों का पता लगाने में। प्रयोग में लाये जा रहे मेटल तथा थर्मल सेंसर्स वाले ग्राउंड राडार अच्छे परिणाम नहीं दे रहे थे। अगर तो दबने वाले के पास कोई मेटल /धातु है तब तो इसके प्रणाम सही आ जाते हैं वरना उम्मीद पूरी नहीं होती। अधिकतर भारतीय इस त्रासदी पे अफ़सोस करके तथा भगवान को दोष दे कर भूल गए लेकिन बेंगलुरु के सी एम् आर तकनिकी संस्था के कुछ छात्रों को इस घटना ने झकझोर दिया और उन्हें नया  तथा  बढ़िया उपकरण  ढूंढने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने ऐसी तकनीक खोजने की कोशिश की जिसे  काम करते समय मेटल या तापमान पर निर्भर न रहना पड़े। उनके द्वारा बनाये गए उपकरण मॉडल तैयार हो चूका है ,ये उपकरण बर्फ  के नीचे दवे जीव को डाइइलेक्ट्रिक कंस्टंट की सहायता ...

डिप्रेशन से मुक्त जीवन आपका हक़ है इसे प्राप्त करने के लिए योग करे / Overcome Depression With Yog & Pranyaam

डिप्रेशन या मानसिक अबसाद , ये बिमारी पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी चनौती  बन कर उभरी है।  पूरी दुनिया में जहाँ ये रोग तेज़ी  से बढ़ रहा है तो भारत भी इस से अछूता नहीं है।  भारत में डिप्रेशन का बढ़ना बहुत खतरनाक है क्योंकि भारत में जनसँख्या बहुत अधिक है लेकिन मनोरोग विशेषज्ञों की संख्या बहुत कम है।  इस भयाभये स्थिति में 'योग -प्राणायाम ' पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण बनके उभरा है।  सुबह -सवेरे शौच से निवृत हो कर सिर्फ साँसों का ही तो प्रयोग है।  हमारे शरीर में जीतनी अधिक ऑक्सीजन होगी सवास्थ्य उतना ही अच्छा होगा।  धर्म या जाति का बिमारी फरक नही करती फिर हम इलाज में फरक क्यों करें ? प्राणायाम तथा योग खुद तो करना ही है अपने परिवार तथा बच्चों को भी करवाना शुरू करें ,क्योंकि आजकल डिप्रेशन के शिकार होने वालों में महिलाएं तथा बच्चों की संख्या भी बहुत बढ़ रही है। भगवान् ने जिसकिसी को भी इस दुनिया में भेजा है उसे खुश रहने का सारा सामान साथ ही भेजता है चाहे इंसान हो या जानवर , फिर हम उदास या डिप्रेस क्यों रहें ? सच बात तो ये है कि उदासी बाहर से भीतर आत...

दुर्गुण मनुष्य को आत्मघाती हमलावर बना देते हैं

भगवान् ने जन्म और मरण का अधिकार अपने पास रखा है। अपने ढंग से सबके जीवन की शुरुआत तथा अंत करवाता है। ना तो हम जन्म चुन सकते हैं और ना ही मृत्यु ही अपने ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। हम सिर्फ बीच के समय {जन्म और मृत्यु }पर अधिकार जता सकते हैं। जो लोग दूसरों के जीवन पर अकारण हस्तक्षेप या आक्रमण करते हैं फिर चाहे उग्रवादियों हों या कट्टरवादी उनको ये याद रखना चाहिए कि भगवान् को उनकी हरकते अच्छी नहीं लगाती।  आजकल आत्मघाती आतंकियों का ज़माना है। पूरी दुनिया को इन आतंकियों ने भयभीत किया हुआ है क्योंकि आतंकि लोग सही मायने में मानव जीवन का महत्व नहीं समझते।  उनका मस्तिष्क गलत विच्चारों से भर कर इतना  भयंकर बना दी जाती है कि वे अपने साथ कईयों को मार कर ही  रसंतुष्ट  होते हैं। बुरे विचारों का असर कितना भयानक होता है बस ऐसा समझें कि जीवन में दुर्गुणों का प्रवेश होते ही इंसान आत्मघाती हमलावर बनने की तैयारी शुरू कर देता है। इंसान के भीतर ही आत्मघाती हमलावर दुर्गुणों के सहारे से पता नहीं कितनी अदृश्य हत्याएं करता है। काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह तथा अह...

लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता रहे -जीना इसी का नाम है

इंसान और जानवर सभी जीवो के बीच एक अदृश्य सेतु बना हुआ होता है इसका निर्माण तभी होता है जब दो लोगों के बीच प्यार या दर्द का करंट दौड़ता हो। ये फर्क नहीं पड़ता दोनों लोग किस परिवार ,जाति ,धर्म या प्रजाति के हैं।  इंसान भी हो सकते हैं जानवर भी। पुरानी फिल्म अनाड़ी का गाना जिसके लेखक शैलेन्द्र थे इन भावो को पुरणत्या व्यक्त करता है-किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार ,किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार जीना इसी का नाम है। इतने प्यारे भाव हों और घर में कलह या अशांति हो तो कमी विचारों की नहीं बल्कि कमी बिकल्पों की है। पुराने समय में घरों के फैसले परिवारों के बड़े बज़ुर्ग ही लेते थे ,उनके आगे कोई ना -नुकर नहीं  चलती थी किसी की हिम्मत ही नहीं होती थी। वक़्त बदला और परिवारों में कई शक्ति केंद्र हो गए। ऐसे विकट समय में अगर किसी से कोई फैसला देने के लिए कहे तो उनको अपना विचार बताते समय ऐसा कहना चाहिए कि मेरे विचार में तो ये काम ऐसे करलो बाकी और भी कई तरीके हैं जो ठीक समझो वही करो। जैसे ही आप विकल्प सामने रखते हैं, फैसला सुनने वालों को आज़ादी मिलती है कुछ...

Tour De France 2017 /टूर डि फ्रांस

1 जुलाई से दुनिया की सबसे प्रसिद्ध साइकिल रेस 'टूर डि फ्रांस ' फ्रांस में आयोजित हो रही है ,तीन सप्ताह चलने वाली ये साइकिल रेस 3500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी को समेटे हुए है। ये दूरी 21 भागों या चरणों में बांटी गयी है। हर दिन एक चरण पूरा करना होता है। कुल मिला कर बहुत ही कठिन और थका देने वाली ये रेस ऊँचे पहाड़ों से होकर गुज़रती है। इस रेस में उतार -चढ़ाव कितने जानलेवा होते हैं उसका एक उदाहरण है ब्रिटेन के सबसे सफल पेशेवर साइकिलिस्ट टॉमी सिम्पसन की मृत्यु हो गयी थी वर्ष 1967 में। उनकी उम्र उस समय 29 वर्ष थी और उन्होंने 12वा सत्र पूरा कर लिया था और 13 वें सत्र की तयारी कर रहे थे तभी मो वांटू पर्वत श्रृंखला पे टॉमी की मृत्यु हो गयी। वे जिस जगह गिरे थे अब वहां एक स्मारक बनाया गया है। हर बार टूर डि फ्रांस के प्रतियोगी इस स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा अपने प्रिय साइकिलिस्ट के लिए गिफ्ट चढ़ाते हैं जिनमे प्रमुख रूप से पानी की बोतले ,हेलमेट आदि होते हैं। ये प्रतियोगिता 1903 में पहली बार आयोजित हुई थी।  इसका पहला आयोजन एक अखबार की बिक्री बढ़ाने के लिए अर्थात विज्ञापन के तोर प...