पिछले काफी समय से भारत में अलप संख्यक अपीजमेंट की राजनीति होती रही है । लेकिन हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद शांत रहे या बोला जाए कि उदासीन रहे, उनको कभी भी एक सुर में किसी भी बात का विरोध करते नहीं देखा गया। अभी भी ऐसा ही है हिन्दू एकता में कोई बिकास नहीं हुआ कुछ वर्ष पहले आमिर खान अभिनीत 'P.K " फिल्म में हिन्दू धर्म पर समूल रूप से कुठारा घात किया गया था ,मज़ाक उड़ाया गया था लेकिन कहीं भी हिन्दुओं में रोष उत्पन नहीं हुआ जबकि भगवान् भोले नाथ को हसीं का पात्र बनाया गया था। फिल्म रिलीज़ ही नहीं हुई अपितु कीर्ति मानो के साथ कमायी करने वाली फिल्मो की लिस्ट में शामिल हो गयी। उधर ताज़ा उदाहरण 'पद्मावती ' है जो राजपूत गरिमा के खिलाफ मानी जा रही है और चारों तरफ भारी बिरोध हो रहा है , वो बात अलग है कि फिल्म अभी रिलीज़ भी नहीं हुई है। ऐसे कई उदाहरण हैं हमारे देश में जब हिन्दू धर्म से बढ़ कर जातियों ने देश और समाज को बाँट दिया। सभी धर्मो में ,पूरी दुनिया में ऐसा ही तांडव है। खैर बात भारत की करें तो पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा हैं , अगर किसी...